
रायगढ़। रायगढ़ वन मंडल में हाथी प्रभावित क्षेत्र में काम करने वाले विभागीय अधिकारी व वन रक्षकों की परेशानी बढ़ गई है। मामला हाथी के खदेडऩे से जुड़ा हुआ है। जान-माल के बढ़ते नुकसान के बीच ग्रामीण, विभागीय अधिकारी व कर्मचारी पर हाथी को खदेडऩे को लेकर दबाव बनाते हैं। वहीं डीएफओ ने स्पष्ट कर दिया है कि हाथी को किसी ने खदेड़ा या इस तरह की कोई सूचना आई तो खैर नहीं।
विभागीय अधिकारी के इस फरमान को हाथी प्रभावित क्षेत्र मे काम करने वाले विभागीय लोग भी मानते हैं, पर मामला विभाग के आला अधिकारी के फरमान से जुड़ा हुआ है। जिसकी वजह से अधिनस्थ कर्मचारी भी कुछ बोलने से परहेज करते हैं।
रायगढ़ जिले के दोनों वन मंडल में दिसंबर माह में हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया है। धरमजयगढ़ वन मंडल में जहां ३ की मौत हो गई। जबकि रायगढ़ वन मंडल में जान का नुकसान तो नहीं पर माल का बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है, जिसमें ग्रामीणों के खेत के साथ स्कूल, आंगनबाड़ी व अन्य स्थान भी शामिल है। हाथियों के बढ़ते उत्पात के बीच अब विभागीय कर्मचारी व अधिकारी को क्षेत्र में ग्रामीणों का रोष भी झेलना पड़ रहा है। विभागीय अधिकारी व कर्मचारी की मानें तो जिस क्षेत्र में हाथी का ज्यादा उत्पात है। ग्रामीणों द्वारा हाथी को उक्त क्षेत्र से खदेडऩे को लेकर दबाव बनाया जा रहा है।
विभागीय अधिकारी को हवाला देकर खदेडऩे से मना करने पर सार्वजनिक रुप से भला-बुरा भी कहा जा रहा है। जिससे काफी शर्मिंदगी भी महसूस होती है, इधर विभाग के आला अधिकारी यानी डीएफओ ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि हाथियों को किसी भी स्थिति में खदेडऩे की पहल नहीं होनी चाहिए। ऐसा करते किसी अधिकारी व कर्मचारी को पकड़ा गया तो उसकी खैर नहीं।
हाथी के नहीं खदेडऩे के पीछे उसके आक्रामक होने की बात कही जा रही है। हाथी प्रभावित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारी भी इस बात को दबी जुंबा से स्वीकार कर रहे हैं, पर मामला विभाग के आला अधिकारी के मौखिक आदेश का है। जिसकी वजह से अधिनस्थ अधिकारी व कर्मचारी भी खुलकर बोलने से परहेज कर रहे हैं।
घरघोड़ा रेंज में 30 हाथी, ग्रामीणों को किया अलर्ट
नए साल के पहले दिन रायगढ़ डिवीजन के घरघोड़ा रेंज में करीब ३० हाथियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। जो टेंडा नावापारा सर्किल व उसके आसपास क क्षेत्र में मौजूद हैं, जो छाल रेंज से घरघोड़ा रेंज में आए हैं। हाथियों के इस दल को देखते हुए आसपास के गांव में मुनादी करा ग्रामीणों को जंगल की ओर जाने से मना किया गया है। इधर बंगुरसिया व जुनवानी में भी २-२ हाथियों का दल है। पर नुकसानी की कोई सूचना नहीं हैं। जिससे विभाग ने राहत की सांस ली है।