
रायगढ़. कालोनियों व बड़े प्लाट के सीमांकन कुछ ही दिनों में हो जाते हैं लेकिन आम जनों द्वारा सीमांकन कराने के लिए कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण सामने आया है।
सरवानी गांव के एक प्रकरण में भू-स्वामी ने जनदर्शन से लेकर लोक सुराज अभियान तक अपने जमीन का सीमांकन कराने के लिए आवेदन लगाया लेकिन इसका निराकरण नहीं हो पाया। ग्राम सरवानी निवासी साघराम पटेल के नाम पर पटवारी हल्का नंबर 15 के खसरा नंबर 249/2में 0.49 हेक्टेयर जमीन है। जिसके सीमांकन कराने के लिए पहले तो उक्त ग्रामीण ने तहसील कार्यालय में आवेदन किया लेकिन उक्त आवेदन में तहसीलदार के आदेश के बाद भी सीमांकन का काम नहीं हुआ।
इसको लेकर काफी आवेदन के बाद भी निराकरण नहीं हुआ तो वह कलक्टर जनदर्शन में गया जहां से एसडीएम को कार्रवाई के लिए निर्देश दिया गया लेकिन फिर से यह मामला नीचले स्तर पर जाकर लटक गया। इसके बाद हाल ही में हुए लोक सुराज अभियान की शुरूआत हुई उक्त ग्रामीण ने फिर एक उम्मीद से लोक सुराज अभियान में अपने जमीन के सीमांकन कराने के लिए आवेदन लगाया। पूरा लोक सुराज अभियान समाप्त हो गया और अब ग्राम स्वराज अभियान चालू हो गया लेकिन इस आवेदन का निराकरण नहीं हुआ। सीमांकन न होने से नाराज ग्रामीण अब फिर से कलक्टर को इस बात से अवगत कराते हुए सीमांकन कराने की मांग किया है। ज्ञात हो कि तहसीलों में अधिकांश तौर पर यह देखने को मिलता है कि अगर किसी कालोनी या बड़े प्लाट के सीमांकन के लिए आवेदन आता है
तो पटवारी व पूरा अमला सजग होकर इसे समय में निराकरण कर देते हैं लेकिन ऐसे आम किसानों के आवेदन काफी दिनों तक लंबित रहता है।
लंबित हैं और भी ढेरों प्रकरण
बताया जाता है कि तहसील कार्यालयों में देखा जाए तो सीमांकन के ढेरों प्रकरण लंबित हैं। जिसमें आवेदक रोजाना तहसील कार्यालय व पटवारी के चक्कर काटते रहता है। समय-समय पर अलग-अलग क्षेत्रों से पटवारियों के मनमानी को लेकर शिकायत भी जिला प्रशासन को मिलते रहती है। इसके बाद भी व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा है।