- नियमानुसार अवार्ड पारित करने के लिए धारा 19 का प्रकाशन अनिवार्य है
रायगढ़. एनटीपीसी के लिए किए गए भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया में पुनर्वास नीति का पेंच अभी सुलझा नहीं है और एक बार फिर राजस्व विभाग ने छूटी हुई जमीन का बिना पुनर्वास नीति का अवार्ड पारित कर दिया है। जबकि नियमानुसार अवार्ड पारित करने के लिए धारा १९ का प्रकाशन अनिवार्य है। उसके पहले ही पुनर्वास नीति का अनुमोदन होना रहता है, लेकिन एनटीपीसी के लिए जो अवार्ड पारित हुआ उसे देखा जाए तो भू-अधिग्रहण के लिए सैद्धान्तिक अनुमति की तिथि का तो उल्लेख किया गया है लेकिन पुनर्वास नीति अनुमोदन होने की तिथि का उल्लेख नहीं है। पारित अवार्ड में सिर्फ इतना बताया गया है कि छत्तीसगढ़ राज्य की आदर्श पुनर्वास नीति के संदर्भ में पुनर्वास नीति अनुमोदन करने की सूचना दी गई है जिसके आधार पर अवार्ड पारित कर दिया गया है।
गौरतलब है कि एनटीपीसी के लिए पूर्व में नौ गांव की जमीन का भू-अधिग्रहण किया गया था। इसमें कई गांव की काफी जमीन छूट गई थी। इसके भू-अर्जन की प्रक्रिया चल रही है। इसी कड़ी में १० सितंबर को राजस्व विभाग ने बोड़ाझरिया के कुछ किसानों की निजी जमीन रकबा करीब ४.१६७ हेक्टेयर को अधिग्रहण करने के लिए अवार्ड पारित कर दिया है। अब इस अवार्ड को लेकर ग्रामीण खुलकर विरोध कर रहे हैं।
एक ही जगह दो अलग-अलग नीति
जानकारों की माने तो एनटीपीसी के जिन प्रभावित किसानों ने रोजगार की मांग की है उनको एनटीपीसी प्रबंधन अपना पुनर्वास नीति दिखा रहा है जबकि इसी प्रोजेक्ट के लिए छूटी हुई जमीन का अधिग्रहण पारित अवार्ड में किए गए उल्लेख के अनुसार छत्तीसगढ़ की आदर्श पुनर्वास नीति लागू करने की बात कही गई है।
कब क्या हुआ इस मामले में
उद्योग विभाग द्वारा जारी पत्र के अनुसार ५ जून २०१५ को उक्त छूटी हुई जमीन के अधिग्रहण के लिए सैद्धान्तिक सहमति प्रदान करते हुए छत्तीसगढ़ राज्य की आदर्श पुनर्वास नीति के संदर्भ में पुनर्वास योजना के अनुमोदन की सूचना दी गई। इसे धारा ४(१) के तहत १५ मार्च २०१६ को जारी होना बताया गया है और धारा १९ का प्रकाशन राजपत्र में १३ अप्रैल २०१८ को प्रकाशित होना बताया गया है।
ये भी पढ़ें