रायगढ़

शौचालय के घोटाले से किस-किस के हाथ में मैल, जांच टीम डोर-टू-डोर जाकर पूछ रही लोगों से

शौचालय निर्माण के नाम पर किए गए घोटाले का मामला अब फिर से सुर्खियों में

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May 07, 2018
शौचालय निर्माण के नाम पर किए गए घोटाले का मामला अब फिर से सुर्खियों में
शौचालय निर्माण के नाम पर किए गए घोटाले का मामला अब फिर से सुर्खियों में

रायगढ़. शौचालय निर्माण के नाम पर किए गए घोटाले का मामला अब फिर से सुर्खियों में आ गया है। इस बार यह सुर्खिया लंबे अंतराल के बाद विभागीय जांच से है।

जिला प्रशासन लंबे समय बाद एक बार फिर से शौचालय घोटाले की जांच करा रहा है। इसके लिए छह टीमें बनाई गई है। यह टीम के सदस्य अब डोर टू डोर जाकर जांच कर रहे हैं। यह जांच दो दिन पूर्व ही शुरू हुई है। वहीं प्रारंभिक जांच में ही टीम को गड़बडिय़ां मिल रही है।


नगर निगम ने करीब एक साल पहले शहर में सात हजार शौचालय बनाने का दावा किया। वहीं इसके एवज में 10 करोड़ रुपए भी खर्च किए। इसके बाद शहर को ओडीएफ भी घोषित कर दिया, लेकिन लगातार यह बात उठती रही कि शहरी क्षेत्र में जो शौचालय बनाए गए हैं वह कागजों में ही है। इस बात की शिकायत लेकर हितग्राही कभी नगर निगम कार्यालय तो कभी कलेक्टोरेट कार्यालय पहुंचते रहे।


ऐसे में पत्रिका ने इस मामले की तह तक पहुंची। इस दौरान इस बात का खुलासा हुआ कि नगर निगम के द्वारा सैकड़ों शौचालय का निर्माण कागजों में ही करा दिया। निगम के द्वारा कागजों में शौचालय बनाने के साथ इसकी पूरी राशि भी आहरित कर ली। वहीं इस राशि को हजम कर लिया गया। ऐसे में पत्रिका ने इस मामले को लेकर अभियान चलाया और निगम अधिकारियों व ठेकेदारों की मिलीभगत की पोल खोली।


मामला उजागर होने के बाद नगर निगम में भी खूब हंगामा हुआ। वहीं जांच कमेटी गठित किए जाने की मांग की। इस भ्रष्टाचार को लेकर विपक्ष निगम अधिकारियों पर हावी हुई। ऐसे में नगर निगम आयुक्त ने सामान्य सभा की बैठक में जांच कमेटी बनाए जाने की घोषणा की।


वहीं छह पार्षदों के साथ तकनीकी अधिकारियों की टीम बनाई गई। इस टीम के द्वारा करीब डेढ़ माह तक जांच की गई। जांच के दौरान व्यापक पैमाने पर खामियां उजागर हुई। हालांकि यह जांच पूरी हो पाती। इससे पहले ही जांच टीम पर ही सवाल खड़े होने लगे।


कुछ लोग जांच टीम पर सवाल खड़े करने लगे। ऐसे में टीम ने जांच रिपोर्ट नगर निगम आयुक्त को सौंप दी। निगम आयुक्त इस जांच रिपोर्ट पर कुछ कार्रवाई करते। इससे पहले ही जिला प्रशासन ने शौचालय घोटाले की जांच कराए जाने की घोषणा की।
जिला प्रशासन ने जांच का दायित्व जिला पंचायत सीईओ को सौंपा। साथ ही जिला प्रशासन की टीम में आरईएस व पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को भी शामिल किया गया। इधर जिला प्रशासन ने जांच टीम तो बना दी, लेकिन जांच को गति नहीं दी। शुरूआत में कुछ वार्डों की जांच करने के बाद मामल को ठंडे बस्ते में डाल दिया। लंबे समय बाद एक बार फिर जांच शुरू की गई है।


अब जांच के लिए डोर टू डोर पहुंच रही टीम
विभागीय अधिकारियों की माने तो जांच के लिए छह सदस्यीय टीम बनाई गई है। इस टीम में पीडब्ल्यूडी व आरईएस के इंजीनियरों को शामिल किया गया है। वहीं जांच की शुरुआत शुक्रवार से की गई है। बताया जा रहा है कि टीम में जिला मुख्यालय के अलावा अन्य ब्लाकों के इंजीनियरों को शामिल किया गया है। ऐसे में पहले दिन जांच टीम वार्डों में पहुंच कर भटक गई थी, लेकिन दूसरे दिन टीम के सदस्य वार्डों के प्रत्येक घरों में जाकर जांच कर रही है।


जांच में फिर उजागर होने लगी खामियां
इन दोनों वार्डों में काफी खामियां मिल चुकी है। अब जब जिला प्रशासन की टीम दोबारा जांच शुरू कर रही है तब भी यहां खामियां मिल रही है। हालांकि जांच टीम के सदस्य मीडिया से दूरी बनाए हुए हैं, लेकिन सूत्र यह बता रहे हैं जांच के दौरान दोनों वार्डों में काफी खामियां मिली है। रविवार को अवकाश होने की वजह से जांच नहीं की गई, लेकिन सोमवार को इन दोनों वार्डों में फिर से टीम जांच के लिए पहुंचेगी।

Published on:
07 May 2018 12:37 pm