रायगढ़

Human Story : वर्षों की लड़ाई, मिला 4383 रुपए, अभी हजार का खर्च शेष!

- फिलहाल आज की तारीख तक इसका भुगतान नहीं हो सका है।

2 min read
Mar 26, 2018
Human Story : वर्षों की लड़ाई, मिला 4383 रुपए, अभी हजार का खर्च शेष!

रायगढ़. तीन साल लड़ाई लडऩे के बाद एक मृत श्रमिक के पक्ष में अक्टूबर 2016 में फैसला आता है और यह कहा जाता है कि अपीलार्थी को 4383 रुपए का भुगतान किया जाए। अब परेशानी यह है कि श्रमिक की मौत हो चुकी है और उसकी बेवा जब इस फैसले को लेकर कंपनी के प्रबंधक के पास पहुंची तो यह कहा गया कि आप पहले एफेडेविड बनवाकर लाओ, इसके बाद आपके राशि का चेक कलकत्ता से बनकर आएगा। बेवा का कहना है कि इसके लिए जो सिस्टम तय किया गया है इसमें ही लगभग एक हजार रुपए खर्च होने की नौबत है। फिलहाल आज की तारीख तक इसका भुगतान नहीं हो सका है।

Read More : Photo Gallery : रामनवमीं पर निकाली गई शोभायात्रा, राम-लक्ष्मण व सीता की झांकियां रहीं आकर्षण का केंद्र
ये मामला मोहन जूटमिल के श्रमिक नेहरूलाल पिता छोटू लाल का है। मिली जानकारी के अनुसार मोहनलाल के द्वारा श्रमआयुक्त रायगढ़ एवं नियंत्रण प्राधिकारी में ये मामला प्रस्तुत किया गया था कि वो इस मिल में 1977 से कार्यरत था और उसे माह में 5239 रुपए मिलता था। मई 2010 में मिल को बंद कर दिया गया। इस प्रकार 33 वर्ष उसने कार्य किया इसके लिए उसे उपादान की राशि 99742 रुपए पाने की पात्रता है। लेकिन मिल की ओर से केवल 47 हजार रुपए ही दिया गया। शेष राशि 52 हजार 742 रुपए का भुगतान नहीं किया गया।

इसके बाद 2015 में इसका फैसला आया जिसमें नियंत्रण पदाधिकारी ने अपीलार्थी के 17 वर्ष की सेवा को मान्य किया और 51383 रुपए उपादान की पात्रता प्रदान की। ऐसे में आवेदक की ओर से इस मामले को अपील में ले जाया गया, जहां से साल 2016 में आवेदक के पक्ष में यह फैसला आया कि मिल प्रबंधन उसे 4383 रुपए का भुगतान करे।

परेशान है बेवा
वर्तमान में श्रमिक नेहरू लाल की मौत हो चुकी है और उसकी विधवा गणेशी बाई को इस फैसले के तहत राशि नहीं मिल सकी है। गणेशी बाई ने बताया कि एक सप्ताह पहले वो प्रबंधक के पास पहुंची तो उसे शपथपत्र सहित अन्य कागजात की मांग की गई, साथ ही कहा गया कि इस राशि का चेक या ड्राफ्ट कलकत्ता से बनकर आएगा तब भुगतान होगा। गणेशी का कहना है कि जो सिस्टम तय किया जा रहा है उसमें ही उसके लगभग एक हजार रुपए खर्च हो जाएंगे। वहीं इस परेशानी को बताने पर प्रबंधन भी सीधे मुंह बात नहीं कर रहा है।

Published on:
26 Mar 2018 12:58 pm