
baby girl in an ambulance: आपातकालीन 108 एंबुलेंस सेवा ने एक बार फिर अपनी तत्परता और सूझबूझ से प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला को समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में प्रसव पीड़ा बढ़ने पर एंबुलेंस को सुरक्षित स्थान पर रोककर ईएमटी ने प्रसव कराया। महिला ने एंबुलेंस में ही एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। प्रसव के बाद मां और नवजात दोनों को सुरक्षित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेरला पहुंचाया गया, जहां दोनों की हालत स्थिर बताई गई है।
जानकारी के अनुसार ग्राम कुसमी निवासी 26 वर्षीय विशंवती बाई को प्रसव पीड़ा होने पर 108 एंबुलेंस की मदद ली गई थी। सूचना मिलने के बाद एंबुलेंस को तत्काल रवाना किया गया। शाम 5:24 बजे सूचना मिलने के महज 11 मिनट बाद 5:35 बजे एंबुलेंस महिला के पास पहुंच गई। इसके बाद महिला को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेरला ले जाया जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में उसकी प्रसव पीड़ा अचानक तेज हो गई। महिला की स्थिति को देखते हुए एंबुलेंस में मौजूद स्टाफ ने तत्काल स्थिति संभाली।
प्रसव की स्थिति को देखते हुए एंबुलेंस को सुरक्षित स्थान पर रोका गया। आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन (ईएमटी) नंदकिशोर ने आवश्यक चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई। उनकी तत्परता से शाम 5:50 बजे महिला ने एंबुलेंस में ही एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। अचानक आई इस आपात स्थिति में ईएमटी ने उपलब्ध संसाधनों और चिकित्सकीय प्रशिक्षण का इस्तेमाल करते हुए प्रसव कराया। बच्ची के जन्म के बाद मां और नवजात की स्थिति पर लगातार नजर रखी गई।
प्रसव के बाद एंबुलेंस के ईएमटी नंदकिशोर और पायलट रोशन ने दोनों को सुरक्षित तरीके से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेरला पहुंचाया। वहां मां और नवजात को भर्ती कर चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। अस्पताल में जांच के बाद मां और बच्ची दोनों की हालत स्थिर और सुरक्षित बताई गई है। समय पर एंबुलेंस के पहुंचने और रास्ते में प्रसव की स्थिति को संभालने से महिला को तत्काल आपातकालीन सहायता मिल सकी।
108 एंबुलेंस सेवा का उद्देश्य आपात स्थिति में मरीजों को जल्द से जल्द चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना है। इस मामले में भी सूचना मिलने के बाद कम समय में एंबुलेंस महिला तक पहुंची। अस्पताल पहुंचने से पहले ही प्रसव की स्थिति बनने पर एंबुलेंस स्टाफ ने मौके के अनुसार आवश्यक चिकित्सा सहायता दी। इस घटना ने आपातकालीन परिस्थितियों में प्रशिक्षित एंबुलेंस कर्मियों की भूमिका को भी सामने रखा है। समय पर सहायता मिलने से महिला और नवजात को सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया जा सका।