इस बीमारी की चपेट में आने से अब तक 110 लोगों की मौत हो गई है।
रायपुर . छत्तीसगढ़ का एक गांव एेसा भी है जहां के सभी लोग किडनी की अजीब बीमारी से जूझ रहे हैं। राजधानी से 80 किलोमीटर दूर गरियाबंद जिले के सूपेबेड़ा और उससे लगे 5 गांवों में किडनी की रहस्यमय बीमारी पिछले एक दशक से फैली हुई है। इस बीमारी की चपेट में आने से अब तक 110 लोगों की मौत हो गई है।
इन मौतों के बाद जांच करने पहुंची डॉक्टरों की टीम भी हैरान रह गई कि गांव का पानी साफ होने के बाद भी कैसे लोगों में किडनी की बीमारी फैल रही है। सरकार यह नहीं बता पा रही है कि देवभोग के हीरा खदानों के आसपास फैली इस बीमारी की आखिर वजह है क्या ?..
डॉक्टर भी नहीं बात पा रहे है आखिर कैसे बचाया जाए मरीजों को
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) की टीम यहां के मरीजों से नमूने लेकर गई है, लेकिन वह भी कोई रिपोर्ट नहीं दे पाई। सूबे का स्वास्थ्य विभाग एक स्पष्ट रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है ताकि साफ हो सके कि गांव वालों को इस रहस्यमय बीमारी से कैसे बचाया जा सके। इस बीच बीमारी का कहर जारी है।
पिछले महीने ही सुपेबेड़ा गांव में एक बीमार व्यक्ति की मौत हुई है। इधर सरकार का लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता टीजी कोसरिया कह रहे हैं, वहां के पानी में फ्लोराइड और कॉर्बन की मात्रा अधिक मिली है।
बोरिंग बंद कर 10 मीटर दूर दूसरा बोर
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने पानी की खराबी बताते हुए गांव के 6 बोर बंद कर दिए हैं। ग्रामीणों को पीने का पानी देने के लिए विभाग ने बंद की गई बोरिंग से 10 मीटर दूर ही दूसरा बोर किया है। इस पानी को सुरक्षित बताया जा रहा है। ग्रामीणों को इस दावे पर भरोसा नहीं हो रहा है। आम आदमी पार्टी के प्रदेश संयोजक डॉ. संकेत ठाकुर का आरोप है कि सरकार ऐसा करके गांव वालों को वहां से निकाल देना चाहती है, ताकि खनन गतिविधियों में आबादी आड़े न आए।
110 लोगों की मौत
आपको बता दें कि सुपरबेड़ा में अब तक किडनी बिमारी के चलते 110 लोगों की मौत हो गई है। गांव के कुर्तीराम भी बीते आठ साल से किडनी की परेशानी से बीमार था। पिछले तीन महीने से उसकी हालत बहुत अधिक बिगडऩे लगी थी। सीएमएचओ ने ग्रामीणों से पूरी वस्तुस्थिति की जानकारी ली। गांव के त्रिलोचन सोनवानी के साथ ही अन्य ग्रामीणों ने मांग रखी कि गांव में जल्द से जल्द उपस्वास्थ्य केन्द्र खोला जाए। यहां उपस्वास्थ्य केन्द्र होना बहुत जरूरी है।
गांवों में किडनी मरीजों की संख्या
सुपेबेड़ा - 235 मरीज
सेनमुड़ा - 45 मरीज
मोडऱापारा - 27 मरीज
सागोनबाड़ी - 26 मरीज
परेवापाली - 31 मरीज
गोहेकला - 12 मरीज
(स्रोत: निजी सर्वे में जुटाई गई जानकारी)
कुछ नहीं कहा जा सकता
बीमारी के बारे में कुछ निश्चयात्मक तौर पर नहीं कहा जा सकता। आइसीएमआर की टीम भी कुछ ठोस नहीं ढूंढ पाई है।
सुब्रत साहू, प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण