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Chhattisgarh BJP Crisis: 100 से ज्यादा इस्तीफों ने बढ़ाई भाजपा की टेंशन! आखिर क्यों छत्तीसगढ़ के BJP कार्यकर्ताओं में है नाराजगी?

BJP Workers Resignation: डोंगरगढ़ में 100 से अधिक भाजपा कार्यकर्ताओं के सामूहिक इस्तीफे से संगठन में हलचल मच गई है। गुटबाजी और मनमानी के आरोपों के बीच प्रदेश नेतृत्व ने मामले का संज्ञान लिया है।
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Chhattisgarh BJP Crisis

Chhattisgarh BJP Crisis: 100 से ज्यादा इस्तीफों ने बढ़ाई भाजपा की टेंशन! (photo-AI)

Chhattisgarh BJP Crisis: छत्तीसगढ़ भाजपा में संगठनात्मक असंतोष एक बार फिर खुलकर सामने आया है। डोंगरगढ़ क्षेत्र के 100 से अधिक कार्यकर्ताओं के सामूहिक इस्तीफे ने पार्टी संगठन में हलचल मचा दी है। इस्तीफा देने वाले कार्यकर्ताओं ने जिला नेतृत्व पर मनमानी, गुटबाजी और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला प्रदेश नेतृत्व तक पहुंचने के बाद संगठन ने भी इसे गंभीरता से लिया है और पदाधिकारियों को कार्यकर्ताओं के सम्मान और सहभागिता के साथ निर्णय लेने की नसीहत दी है।

BJP Crisis: 100 से ज्यादा इस्तीफों से बढ़ी संगठन की चिंता

हाल ही में डोंगरगढ़ क्षेत्र के 100 से अधिक भाजपा कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इस घटनाक्रम ने जिला संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्टी के भीतर इसे केवल स्थानीय विवाद नहीं बल्कि संगठनात्मक समन्वय की चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।प्रदेश नेतृत्व तक मामला पहुंचने के बाद नाराजगी के कारणों की जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि स्थिति को जल्द सामान्य किया जा सके।

कार्यकर्ताओं ने लगाए गुटबाजी और मनमानी के आरोप

इस्तीफा देने वाले कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जिला स्तर पर संगठन में पक्षपात और गुटबाजी बढ़ रही है। उनका कहना है कि लंबे समय से सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की जा रही है, जबकि कुछ चुनिंदा लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। कार्यकर्ताओं का यह भी कहना है कि संगठनात्मक फैसलों में जमीनी कार्यकर्ताओं की राय को महत्व नहीं दिया जाता, जिससे असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।

प्रदेश नेतृत्व ने दिए सख्त संकेत

मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश भाजपा नेतृत्व ने जिला पदाधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि संगठन में कार्यकर्ताओं का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए। सभी महत्वपूर्ण निर्णय कार्यकर्ताओं के सुझावों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिए जाएं। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि किसी पदाधिकारी के खिलाफ मनमानी या कार्यकर्ताओं की अनदेखी जैसी शिकायतें सही पाई जाती हैं तो संगठन आवश्यक कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी शिकायतें

यह पहली बार नहीं है जब कार्यकर्ताओं की नाराजगी प्रदेश नेतृत्व तक पहुंची हो। इससे पहले भी कई जिलों से संगठनात्मक असंतोष और पदाधिकारियों के व्यवहार को लेकर शिकायतें मिल चुकी हैं। प्रदेश भाजपा कार्यालय में आयोजित 'सहयोग केंद्र' के दौरान भी कई कार्यकर्ताओं और छोटे पदाधिकारियों ने वरिष्ठ नेताओं, विधायकों और मंत्रियों द्वारा कार्यकर्ताओं की अनदेखी किए जाने की शिकायत दर्ज कराई थी। कई कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा था कि आम जनता के काम समय पर नहीं हो रहे हैं, जिससे संगठन की छवि प्रभावित हो रही है।

कार्यकर्ताओं को मनाने की शुरू हुई कवायद

भाजपा नेतृत्व नहीं चाहता कि यह विवाद आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों और भविष्य की चुनावी तैयारियों पर असर डाले। यही वजह है कि वरिष्ठ नेताओं ने नाराज कार्यकर्ताओं से संवाद शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, संगठन जल्द ही स्थानीय स्तर पर बैठक कर विवाद के कारणों पर चर्चा करेगा और सभी पक्षों से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश करेगा।

संगठन के लिए बड़ा संदेश

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी भी राजनीतिक दल की सबसे बड़ी ताकत उसके जमीनी कार्यकर्ता होते हैं। ऐसे में यदि कार्यकर्ताओं में लगातार असंतोष बढ़ता है तो उसका असर संगठन की मजबूती और चुनावी रणनीति दोनों पर पड़ सकता है। यही कारण है कि प्रदेश नेतृत्व इस पूरे मामले को केवल जिला स्तर का विवाद नहीं, बल्कि संगठनात्मक अनुशासन और कार्यकर्ता संवाद से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में देख रहा है।