
ताबीर हुसैन @ रायपुर.कहते हैं जब किसी चीज को हासिल करने का जुनून हो तो दूरियां कोई मायने नहीं रखती। ये बात सिटी के 18 वर्षीय अमितेश मिश्रा पर फिट बैठती है। उन्होंने जर्मनी के कोच रेजनन सेलिक्स से एक महीने तक न सिर्फ ऑनलाइन ट्रेनिंग ली, उनसे सीधे तौर पर स्केटिंग के गुर सीखने पुर्तगाल जा पहुंचा। जकार्ता के पालमबर्ग में 30 व 31 अगस्त को वे रोलर स्केटिंग और स्केट बोर्डिंग में पार्टिसिपेट करेंगे। वे हैं तो अभी 12 वीं के स्टूडेंट लेकिन यहां तक पहुंचने की कहानी बड़ी दिलचस्प है। पापा राकेश मिश्रा फॉरेस्ट में एसडीओ हैं, जबकि मॉम हाउसवाइफ है। अमितेश पहले शहर की एक नामचीन सीबीएसइ पैटर्न स्कूल में पढ़ाई कर रहा था, लेकिन स्केटिंग में बढ़ते रुझान की वजह से पैरेंट्स ने सीजी बोर्ड स्कूल में दाखिला दिला दिया।
नेशनल में जीते 4 गोल्ड
स्कूल के कोच प्रीतजोत बावेजा ट्रेनिंग दे रहे थे। उन्हें लगा कि इसके में क्वालिटी है, तो उन्होंने क्लब ज्वाइन की सलाह दी। अमितेश ने पुलिस ग्राउंड के स्केट रैंक में प्रैक्टिस की। 2014 में स्टेट लेवल पर सलेक्शन हुआ। इस स्पर्धा में 10 इवेंट होते हैं, जिसमें से 4 में हिस्सा लिया जा सकता था। अमितेश ने चारों में गोल्ड हासिल किया। कहीं से पता चला कि मैसूर में कोच श्रीकांत राव हैं जो बढि़या ट्रेनिंग देते हैं। वहां 40 किमी की स्पीड बैंड सिंथेटिंग रिंक है। राव के घर पर ही रहकर उसने ट्रेनिंग ली। इसके बाद नेशनल, सीबीएसइ, नेशनल में गोल्ड, 2016 में गुलमर्ग में गोल्ड हासिल किया।
पल्स रेट पर जर्मनी से नजर
अमितेश ने इंटरनेट से जर्मन कोच रेजनन सेलिक्स से कॉन्टेक्ट किया और उन्हें ट्रेनिंग के लिए आग्रह किया। वे तैयार हो गए। छाती पर एक एक्युप्मेंट लगाकर अमितेश यहां प्रेक्टिस करता और जर्मनी से कोच उसकी पल्स रेट सुना करते थे। ब्लूटूथ के माध्यम से एक्टिविटीज पर नजर रखते थे।
और एेसे पहुंचे पुर्तगाल
जर्मन कोच ने जो टाइम फिक्स किया था, उसके मुताबिक यहां दोपहर का वक्त हुआ करता था, कड़ी धूप मेंं अभ्यास करना मुश्किल था, कोच को जब पता चला तो उन्होंने कहा कि वे टीम को लेकर पुर्तगाल जा रहे हैं, वहीं आ जाओ। अमितेश ने पहली फुर्सत में वहां जाने का फैसला लिया। पहले हफ्ते की ट्रेनिंग में वह लास्ट में पहुंचने के बावजूद फस्र्ट आया। कोच ने उसके परफॉर्मेंस को देखकर कहा, ' मैं तुम्हें जरूर ट्रेंड करूंगा, तुम वहां तक पहुंचोगे जहां तक पहुंचना चाहते हो'। पुर्तगाल से ही दिल्ली पहुंच अमितेश ने इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन के सलेक्शन प्रोसेस में हिस्सा लिया और उनका चयन हो गया।