
Application Pending: सरकारी दफ्तरों में नागरिकों से जुड़े आवेदनों का तय समय-सीमा में निराकरण नहीं करने पर अब जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में अभनपुर तहसील में जाति प्रमाण पत्र के 17 आवेदन निर्धारित समय-सीमा के बाद भी लंबित पाए गए। मामले में स्टेनो हेमलता दीवान पर कुल 1700 रुपए का अर्थदंड लगाया गया है।
जानकारी के अनुसार लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत जाति प्रमाण पत्र से जुड़े इन आवेदनों का तय समय में निराकरण किया जाना था। जांच के दौरान 17 आवेदन ऐसे मिले, जिनका समय-सीमा के भीतर निराकरण नहीं हुआ था। प्रशासन ने प्रत्येक लंबित आवेदन पर 100 रुपए के हिसाब से अर्थदंड लगाया। इस तरह 17 आवेदनों के लिए कुल 1700 रुपए का जुर्माना निर्धारित किया गया। अर्थदंड की राशि नियमानुसार चालान के माध्यम से शासकीय कोष में जमा कराई गई है।
यह कार्रवाई रायपुर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देशानुसार की गई। लंबित आवेदनों के निराकरण में हुई देरी को सेवा में लापरवाही के तौर पर लिया गया। इसके बाद संबंधित कर्मचारी पर लोक सेवा गारंटी अधिनियम के प्रावधानों के तहत अर्थदंड लगाया गया। प्रशासन की ओर से इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य केवल जुर्माना लगाना नहीं, बल्कि सरकारी सेवाओं के लिए तय समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करना भी है। इससे संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था को मजबूती मिलती है।
लोक सेवा गारंटी अधिनियम का उद्देश्य आम नागरिकों को विभिन्न सरकारी सेवाएं निर्धारित समय-सीमा के भीतर उपलब्ध कराना है। इसके तहत कई सेवाओं के लिए समय-सीमा तय की गई है, ताकि लोगों को अपने जरूरी दस्तावेज और प्रमाण पत्र के लिए अनावश्यक रूप से सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। यदि निर्धारित अवधि में आवेदन का निराकरण नहीं होता है तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी की जवाबदेही तय की जा सकती है। नियमों के तहत कुछ मामलों में जिम्मेदार व्यक्ति पर अर्थदंड का प्रावधान भी है।
अभनपुर तहसील में हुई इस कार्रवाई के बाद प्रशासन की ओर से समय-सीमा में सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिए जाने का संदेश गया है। जाति प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज विद्यार्थियों, नौकरी और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए जरूरी होते हैं। ऐसे में इनके आवेदन लंबे समय तक लंबित रहने से आवेदकों को परेशानी हो सकती है। 17 आवेदनों में हुई देरी के मामले में 1700 रुपए का अर्थदंड लगाए जाने के बाद अब संबंधित व्यवस्था में समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा।