
Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अमरजीत भगत ने राहुल गांधी की तुलना महात्मा गांधी से करते हुए कहा कि जिस तरह महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के खिलाफ देश की आजादी की लड़ाई लड़ी थी, उसी तरह राहुल गांधी आज देश के हितों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
हालांकि स्वास्थ्य मंत्री और भाजपा नेता श्याम बिहारी जायसवाल ने इस तुलना को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि दोनों व्यक्तित्वों के बीच किसी प्रकार की समानता नहीं है। एक विशेष चर्चा के दौरान कांग्रेस के आगामी प्रशिक्षण शिविर, सुशासन तिहार, स्काई वॉक, कांग्रेस संगठन, धर्म, नकली जेवर विवाद और हसदेव अरण्य सहित कई मुद्दों पर दोनों नेताओं ने अपनी-अपनी राय रखी।
कांग्रेस के आगामी प्रशिक्षण शिविर को लेकर अमरजीत भगत ने कहा कि पार्टी हाईकमान ने छत्तीसगढ़ को गंभीरता से लिया है। नए जिला अध्यक्षों के लिए आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में राहुल गांधी की मौजूदगी कार्यकर्ताओं के लिए बड़ा संदेश है। भगत ने कहा कि पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं में उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ा है तथा इस शिविर से कांग्रेस को कई नए नेतृत्वकर्ता मिलेंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण शिविर कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां से नवरत्न निकलेंगे जो भविष्य में संगठन को नई दिशा देंगे।
अमरजीत भगत के ‘नवरत्न’ वाले बयान पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि समुद्र मंथन में नवरत्नों के साथ विष भी निकला था और कांग्रेस को यह भी बताना चाहिए कि उस विष को कौन धारण करेगा। जायसवाल ने कहा कि आजादी के बाद कांग्रेस ने देश के साथ जो किया, यदि वह अपनी गलतियों को स्वीकार कर लेती तो आज उसे ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज अपने कर्मों की सजा भुगत रही है। देश की दुर्गति के लिए भी वही जिम्मेदार है।
पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने राज्य सरकार के सुशासन तिहार कार्यक्रम को "सुपर फ्लॉप" करार दिया। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल में आयोजित भेंट-मुलाकात कार्यक्रम जनता के बीच काफी लोकप्रिय रहा था। भगत के अनुसार, उस दौरान लोगों की समस्याओं का मौके पर समाधान होता था और आज भी लोग उस व्यवस्था को याद करते हैं।
वहीं स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि भेंट-मुलाकात कार्यक्रम पूरी तरह पूर्व नियोजित होते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यक्रमों में पहले से प्रशिक्षित लोगों को ही प्रवेश दिया जाता था, जबकि वर्तमान सरकार का सुशासन तिहार पूरी तरह वास्तविक और जनता से सीधे जुड़ा कार्यक्रम है।
रायपुर के स्काई वॉक प्रोजेक्ट से जुड़े सामानों के खराब होने के मामले में अमरजीत भगत ने भाजपा नेता और पूर्व मंत्री राजेश मूणत पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि स्काई वॉक परियोजना के हालात देखकर शायद राजेश मूणत की आत्मा को शांति मिलेगी। भगत ने कहा कि उन्होंने लोगों को जमीन छोड़कर आसमान में चढ़ाने का बीड़ा उठाया था, लेकिन वह सफल नहीं हो पाए।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष बदलने की चर्चाओं के बीच अमरजीत भगत ने खुद को इस दौड़ से बाहर बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी स्वयं को प्रदेश अध्यक्ष पद का दावेदार नहीं माना और पार्टी जो जिम्मेदारी देती है, उसे निभाने का प्रयास करते हैं।
नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत मंत्रोच्चार के साथ किए जाने के सवाल पर अमरजीत भगत ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है और सभी को अपने-अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता है। उन्होंने कहा कि किसी को भी अपने धार्मिक विचार दूसरों पर थोपने का प्रयास नहीं करना चाहिए। भगत ने कहा कि जो जिस धर्म को मानता है, वह उसका पालन करे, लेकिन दूसरों पर उसे थोपना उचित नहीं है।
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में विवाहित जोड़ों को कथित तौर पर नकली जेवर दिए जाने के मामले में भी अमरजीत भगत ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नकली चीजों का चलन बढ़ता जा रहा है और इसके लिए शासन तथा प्रशासन दोनों जिम्मेदार हैं। भगत ने तंज कसते हुए कहा कि अब नकली प्रमाण पत्रों और नकली नेताओं की चर्चा भी आम होती जा रही है।
प्रदेश में लगातार हो रही वन कटाई और विशेष रूप से हसदेव अरण्य क्षेत्र में पेड़ों की कटाई को लेकर अमरजीत भगत ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन पर निर्भर लोगों के जीवन पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। जहां भी स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं, उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। भगत ने बताया कि हसदेव अरण्य को बचाने के लिए कांग्रेस ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है और आने वाले समय में पार्टी प्रदेशभर में वन कटाई के खिलाफ आंदोलन तेज करेगी।
राहुल गांधी और महात्मा गांधी की तुलना को लेकर शुरू हुई यह बहस अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है। कांग्रेस जहां राहुल गांधी को संघर्ष और जनहित की राजनीति का चेहरा बताने में जुटी है, वहीं भाजपा इस तुलना को इतिहास और वर्तमान राजनीति के बीच अनुचित समानता बताकर खारिज कर रही है। आगामी प्रशिक्षण शिविर और राहुल गांधी के दौरे के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है।