Mother's Day Special: मदर्स डे पर जानिए बलवीर कौर की प्रेरणादायक कहानी। पति के निधन के बाद उन्होंने दूसरों के घरों में काम किया।
Mother's Day Special: पंजाब के Amritsar में जन्मीं बलवीर कौर की जिंदगी शादी के बाद Raipur में अपने परिवार के साथ खुशहाल चल रही थी। लेकिन साल 2009 में पति के अचानक निधन ने उनकी दुनिया बदल दी। एक पल में सिर से पति का साया उठ गया और कंधों पर बच्चों की पूरी जिम्मेदारी आ गई।
पति के निधन के बाद बलवीर कौर ने हार नहीं मानी। उन्होंने दूसरों के घरों में झाड़ू-पोंछा किया, बर्तन मांजे, अस्पताल में खाना बनाया और सिलाई-बुनाई जैसे छोटे-बड़े हर काम किए, ताकि बच्चों की पढ़ाई और भविष्य प्रभावित न हो।
तीन साल तक घरों में काम करने के बाद बलवीर ने खुद का काम शुरू करने का फैसला किया। आज All India Institute of Medical Sciences Raipur के पास वह नींबू पानी और लस्सी का ठेला लगाती हैं। धूप, बारिश या थकान—कोई भी मुश्किल उन्हें अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटाती। बलवीर का संघर्ष आज भी जारी है। नगर निगम की कार्रवाई के डर से उन्हें बार-बार अपना ठेला इधर-उधर लगाना पड़ता है। लेकिन उन्होंने कभी शिकायत नहीं की, बल्कि हर चुनौती को मुस्कुराकर स्वीकार किया।
पति के जाने के बाद अगर किसी ने उनका साथ दिया, तो वह उनकी ननद थीं। बलवीर कहती हैं, “मेरे सास-ससुर नहीं थे, लेकिन मेरी ननद हर मुश्किल में मेरे साथ खड़ी रहीं।” उनके लिए यह रिश्ता परिवार से बढ़कर एक मजबूत सहारा बन गया। पांच भाई-बहनों में से एक बलवीर बताती हैं कि पति के निधन के बाद उन्हें उम्मीद थी कि मायका उनका सहारा बनेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भाइयों और परिवार ने उनसे दूरी बना ली। यह दर्द आज भी उनकी आवाज में साफ महसूस होता है।
विडंबना यह है कि जिस परिवार से उन्हें सहारा नहीं मिला, आज वही बलवीर अपने हार्ट पेशेंट पिता को पिछले तीन साल से अपने साथ रखकर उनका इलाज करा रही हैं। वह कहती हैं, “जो भी हुआ, वो मेरे पिता हैं… उनकी देखभाल करना मेरी जिम्मेदारी है।”
जब उनसे पूछा गया कि मां होने का मतलब क्या है, तो उनकी आंखें भर आईं। उन्होंने कहा, “मैं बस इतना चाहती हूं कि मेरे बच्चों को वो सब मिले, जो मुझे कभी नहीं मिला।” बलवीर कौर की कहानी सिर्फ संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि उस अटूट ममता की मिसाल है, जो हर मुश्किल के आगे भी झुकती नहीं।