Bhupesh Baghel Statement: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार, आरएसएस और धार्मिक मुद्दों पर तीखा बयान दिया है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है और सियासत में नई बहस छिड़ गई है।
Bhupesh Baghel Statement: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने एक दिवसीय दौरे के दौरान केंद्र सरकार, आरएसएस और धार्मिक गुरुओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य को निशाने पर लेते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और धार्मिक मुद्दों पर सवाल उठाए। बघेल ने गौमांस भक्षण, अयोध्या प्राण-प्रतिष्ठा और धार्मिक परंपराओं को लेकर खुलकर बयान दिया। उन्होंने कहा कि धर्म के नाम पर राजनीति की जा रही है और कई अहम मुद्दों पर तथाकथित धर्मगुरु चुप हैं। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है।
भूपेश बघेल ने कहा कि यदि रामभद्राचार्य खुद को बड़ा ज्ञानी मानते हैं, तो उन्हें इन मुद्दों पर अपनी राय स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार में ऐसे लोग शामिल हैं, जिन पर गौमांस भक्षण के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन तथाकथित धर्म के ठेकेदार इस पर चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने कहा कि केरल के मंत्री को मंत्रिमंडल में जगह दी गई, लेकिन इस पर कोई धार्मिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
पूर्व मुख्यमंत्री ने अयोध्या में हुई प्राण-प्रतिष्ठा को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जीवन से जुड़े प्रसंगों में परंपराओं का विशेष महत्व रहा है। बघेल ने कहा कि जब लंका जाने के लिए पुल निर्माण के दौरान पूजा हुई थी, तब माता सीता की अनुपस्थिति में उनकी प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान पूरा किया गया था। लेकिन अयोध्या में बिना शंकराचार्यों की मौजूदगी के प्राण-प्रतिष्ठा कर दी गई, जो कई धार्मिक परंपराओं के खिलाफ माना गया।
भूपेश बघेल ने आरएसएस को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि आज आरएसएस खुद को हिंदू धर्म का सबसे बड़ा ठेकेदार मानने लगा है। बघेल ने तंज कसते हुए कहा कि आरएसएस प्रमुख Mohan Bhagwat ने कभी किसी मंच से संस्कृत का एक श्लोक तक नहीं बोला, लेकिन धर्म और संस्कृति पर सबसे ज्यादा बयानबाजी की जाती है।
अपने बयान में भूपेश बघेल ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump का भी जिक्र किया और कहा कि देश की राजनीति अब धार्मिक और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों के जरिए प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के मूल मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है।