
रायपुर@संतराम साहू। BJP Gen-Z Strategy: प्रदेश भाजपा के सामने अब युवा राजनीति में नई पीढ़ी को अपने साथ जोड़ने की चुनौती खड़ी हो गई है। खासकर जेन-जी मौजूदा राजनीतिक मुद्दों पर जिस तरह खुलकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं, उसने भाजपा युवा मोर्चा की रणनीति को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है। युवाओं के बीच लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर राजनीतिक मुद्दों की बढ़ती चर्चा को संगठन गंभीरता से देख रहा है। फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा ‘वोट चोरी’ के मुद्दे को लेकर है।
युवा वर्ग के एक हिस्से में यह मुद्दा सोशल मीडिया, कैंपस और विभिन्न सार्वजनिक मंचों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। भाजपा संगठन की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि जेन-जी युवा पारंपरिक राजनीतिक भाषणों के बजाए सीधे सवाल, तथ्य और जवाबदेही को प्राथमिकता दे रहे हैं। ऐसे में पुराने तरीके से युवाओं तक पहुंच बनाने की रणनीति को पर्याप्त नहीं माना जा रहा है।
भाजपा युवा मोर्चा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जेन-जी का बड़ा हिस्सा राजनीतिक जानकारी के लिए सोशल मीडिया पर निर्भर है। यहां किसी भी मुद्दे पर कुछ ही समय में बहस का माहौल बन जाता है। विरोधी दलों के अभियान और युवाओं के प्रोटेस्ट को भी संगठन इसी नजरिए से देख रहा है। ऐसे में सरकार की योजनाओं और भाजपा के विचारों को युवाओं तक पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नए तरीके अपनाने की तैयारी है।
संगठन स्तर पर युवाओं को जोड़ने के लिए नए सिरे से प्लान तैयार किया जा रहा है। इसमें कॉलेज और कैंपस से जुड़े युवाओं के साथ संवाद, सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं की टीम, रोजगार-शिक्षा जैसे मुद्दों पर संवाद और बूथ स्तर पर नए युवा चेहरों को जिम्मेदारी देने पर जोर रहेगा। भाजपा का प्रयास है कि युवा मोर्चा केवल कार्यक्रम आयोजित करने वाला संगठन न रहकर युवाओं के सवालों और उनकी नाराजगी को समझने वाला मंच बने।
आने वाले चुनावों को देखते हुए 18 से 25 वर्ष की उम्र के नए मतदाताओं को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यही वजह है कि भाजपा संगठन जेन-जी के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने के लिए रणनीति में बदलाव कर रहा है। संगठन के सामने चुनौती सिर्फ युवाओं को अपने पक्ष में लाने की नहीं, बल्कि उनके बीच उठ रहे सवालों का जवाब देने और लगातार संवाद बनाए रखने की भी है।
आने वाले समय में युवा वोटरों की पसंद और सोशल मीडिया पर बनने वाली धारणा चुनावी राजनीति को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में भाजपा युवा मोर्चा के लिए जेन-जी को साधना अब महज संगठनात्मक अभियान नहीं, बल्कि बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गया है।