
छत्तीसगढ़ के गांवों में बढ़ेंगी शहरी सुविधाएं (Photo Source- AI Generate)
CG Govt Scheme: छत्तीसगढ़ में बड़े शहरों के आसपास बसे गांवों को बेहतर सुविधाएं देने और शहरी विकास से जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने छह सदस्यीय राज्य स्तरीय समिति गठित की है। यह पहल 16वें वित्त आयोग के तहत शहरीकरण प्रीमियम घटक के अंतर्गत की जा रही है। योजना का उद्देश्य शहरों के आसपास तेजी से विकसित हो रहे ग्रामीण क्षेत्रों को व्यवस्थित तरीके से शहरी विकास की मुख्यधारा में शामिल करना है।
इस योजना के तहत पात्र नगरीय निकायों के आसपास के गांवों की पहचान की जाएगी। इसके बाद उन्हें नगरीय निकायों में शामिल करने और वहां बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने के लिए कार्ययोजना तैयार होगी। योजना में वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर प्रति व्यक्ति 2,000 रुपये का एकमुश्त क्षमता निर्माण अनुदान देने का प्रावधान है। यह राशि संबंधित विकास योजना के तहत निर्धारित पात्रता और शर्तों के अनुसार होगी। इसे प्रत्येक ग्रामीण के खाते में सीधे मिलने वाली नकद सहायता नहीं समझना चाहिए।
शहरीकरण प्रीमियम घटक के तहत एक लाख या उससे अधिक आबादी वाले नगरीय निकायों और उनके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। समिति यह तय करेगी कि किन गांवों को योजना में शामिल किया जा सकता है और उनके विकास के लिए किन सुविधाओं की जरूरत है। शहरों के नजदीक स्थित कई गांवों में आबादी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, नाली, स्ट्रीट लाइट और कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाओं की मांग भी बढ़ती है। योजना के जरिए इन क्षेत्रों का विकास व्यवस्थित तरीके से करने और भविष्य में शहरी विस्तार से जुड़ी समस्याओं को कम करने का प्रयास किया जाएगा।
योजना को जमीन पर लागू करने के लिए समिति तीन वर्षीय परिवर्तन योजना तैयार करेगी। इसमें गांवों को नगरीय निकायों में शामिल करने के बाद जरूरी बदलावों और विकास कार्यों की रूपरेखा तय की जाएगी। समिति की जिम्मेदारी केवल गांवों के चयन तक सीमित नहीं होगी। ग्राम पंचायतों से नगरीय निकायों को संपत्तियों, सरकारी रिकॉर्ड और संबंधित दायित्वों के हस्तांतरण की प्रक्रिया भी तय की जाएगी। इससे प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव के दौरान रिकॉर्ड और जिम्मेदारियों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा। इसके अलावा, नए शामिल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। कर व्यवस्था लागू करने से जुड़े पहलुओं को भी परिवर्तन योजना में शामिल किया जाएगा, ताकि नए क्षेत्रों को नगरीय प्रशासन के अनुरूप विकसित किया जा सके।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने योजना के संचालन और तैयारी के लिए छह सदस्यीय राज्य स्तरीय समिति गठित की है। समिति की अध्यक्षता अपर संचालक, नगरीय प्रशासन एवं विकास करेंगे। समिति में विभाग के मुख्य अभियंता, संयुक्त संचालक और उप संचालक (विविध शाखा) को सदस्य बनाया गया है। राज्य शहरी विकास अभिकरण यानी सूडा के अधीक्षण अभियंता भी समिति में शामिल होंगे। कार्यपालन अभियंता को सदस्य सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। यह समिति पात्र नगरीय निकायों और आसपास के गांवों की पहचान करने के साथ ही कार्ययोजना तैयार करेगी। केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित शर्तों का पालन सुनिश्चित करना भी समिति की जिम्मेदारी होगी।
योजना के तहत शामिल किए जाने वाले क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर रहेगा। इसमें साफ पेयजल की व्यवस्था, आधुनिक कचरा प्रबंधन, बेहतर ड्रेनेज सिस्टम और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं का विकास शामिल है। इसके साथ ही सार्वजनिक परिवहन की पहुंच बढ़ाने और स्वास्थ्य सेवाओं, शैक्षणिक संस्थानों तथा डिजिटल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने की दिशा में भी काम किया जा सकता है।हालांकि, इन सुविधाओं का वास्तविक विस्तार संबंधित क्षेत्र की जरूरतों, स्वीकृत कार्ययोजना और उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर करेगा। नियोजित विकास से शहरों के आसपास बिना योजना के होने वाले विस्तार को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। इससे भविष्य में सड़कों, जल निकासी और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर बढ़ने वाले दबाव को भी बेहतर तरीके से संभाला जा सकेगा।
शहरी सुविधाओं के विस्तार से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योगों, सेवा क्षेत्र और स्टार्टअप के लिए अवसर बढ़ सकते हैं। बेहतर सड़क संपर्क, परिवहन और डिजिटल सुविधाएं स्थानीय कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद कर सकती हैं। इससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना भी रहेगी। इसके अलावा, व्यवस्थित भू-उपयोग और बेहतर बुनियादी सुविधाओं से जमीन और संपत्तियों के आर्थिक मूल्य पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है। हालांकि, इसका लाभ क्षेत्र में होने वाले वास्तविक विकास और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
16वें वित्त आयोग की अवधि वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निर्धारित है। इसी अवधि के तहत शहरीकरण प्रीमियम घटक के माध्यम से पात्र क्षेत्रों में योजनाबद्ध विकास को बढ़ावा देने की तैयारी की जा रही है।छत्तीसगढ़ में गठित राज्य स्तरीय समिति अब पात्र क्षेत्रों की पहचान, विकास की जरूरतों और तीन वर्षीय परिवर्तन योजना से जुड़े पहलुओं पर काम करेगी। योजना का उद्देश्य शहरों के आसपास बसे गांवों को बेहतर बुनियादी सुविधाओं से जोड़ना और बढ़ती आबादी के अनुरूप शहरी विकास को व्यवस्थित बनाना है। इससे आने वाले वर्षों में पात्र ग्रामीण क्षेत्रों के विकास की दिशा तय करने में मदद मिल सकती है।
Updated on:
09 Oct 2026 01:58 pm
Published on:
09 Oct 2026 01:45 pm
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