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जमीन के इस्तेमाल के नियमों में बदलाव, छत्तीसगढ़ में कारोबार और निवेश की प्रक्रिया होगी आसान, जानें कैसे!

Land Development Rules 1984: छत्तीसगढ़ सरकार ने भूमि उपयोग के नियमों में संशोधन किया है। नई व्यवस्था में नेगेटिव लिस्ट मॉडल लागू किया गया है, जिससे कारोबार और निवेश की प्रक्रिया आसान बनाने के साथ शहरी विकास को गति देने पर जोर है।
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रायपुर

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Khyati Parihar

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अजय रघुवंशी

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Oct 09, 2026

Chhattisgarh News

कारोबार और निवेश की प्रक्रिया आसान (फोटो सोर्स- AI)

रायपुर@अजय रघुवंशी। Chhattisgarh Land Use Rules: कारोबार को आसान बनाने और निवेश को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने भूमि उपयोग के नियमों में बदलाव किया है। केंद्र सरकार के डीरिगुलेशन और अनुपालन का बोझ कम करने संबंधी सुधारों के अनुरूप छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम, 1984 में संशोधन किया गया है।

नई व्यवस्था में नेगेटिव लिस्ट मॉडल अपनाया गया है। इसके तहत भूमि उपयोग की प्रत्येक श्रेणी में प्रतिबंधित गतिविधियों को स्पष्ट किया जाएगा, जबकि अन्य गतिविधियों के लिए अनुमति की प्रक्रिया में ज्यादा लचीलापन रहेगा। सरकार को उम्मीद है कि इस बदलाव से कारोबारियों और निवेशकों को सुविधा मिलेगी और शहरी विकास को गति मिलेगी।

संशोधन के बाद आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्रों में अस्पताल, स्कूल और कार्यालय जैसी सुविधाओं को अनुमति दी गई है। इससे लोगों को अपने आसपास ही शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार से जुड़ी सुविधाएं मिल सकेंगी। साथ ही आवागमन और यातायात का दबाव कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि प्रदूषणकारी उद्योगों को आवासीय और मिश्रित से दूर रखा गया है।

दो साल में 885 करोड़ की केंद्रीय सहायता

शहरी नियोजन सुधारों के लिए छत्तीसगढ़ को केंद्र सरकार की विशेष सहायता योजना के तहत दो वर्षों में 885 करोड़ रुपए मिले हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 800 करोड़ और 2025-26 में 85 करोड़ रुपए की सहायता प्राप्त हुई। राज्य सरकार के अनुसार भूमि उपयोग नियमों में बदलाव इसी सुधार प्रक्रिया का हिस्सा है।

नेगेटिव लिस्ट आधारित व्यवस्था से नियमों में स्पष्टता आने और अनावश्यक प्रक्रियाएं घटने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि इससे निवेशकों और उद्यमियों को सुविधा मिलेगी तथा आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के लिए नए अवसर बनेंगे। त्रिपुरा, मध्यप्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में भी इस मॉडल को अपनाया गया है।

निवेश, रोजगार और शहरी विकास को मिलेगी नई गति

आवास एवं पर्यावरण विभाग के अधिकारियों के मुताबिक तेजी से बढ़ते शहरीकरण और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार के साथ भूमि उपयोग की आवश्यकताएं भी लगातार बदल रही हैं। आवासीय क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता, व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार और औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिक सुविधाओं का विकास आधुनिक शहरी नियोजन के महत्वपूर्ण पहलू हैं।

औद्योगिक क्षेत्रों में हॉस्टल, डॉर्मिटरी और श्रमिक आवास की सुविधा

राज्य सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों और श्रमिकों की आवश्यकताओं को भी भूमि उपयोग सुधारों में विशेष महत्व दिया है। संशोधित प्रावधानों के अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्रों में हॉस्टल, डॉर्मिटरी तथा संबंधित श्रमिकों के लिए आवास जैसी सुविधाओं को अनुमति योग्य गतिविधियों में शामिल किया गया है।