CG Film: छत्तीसगढ़ी सिनेमा में तकनीक के साथ-साथ कथानक में भी बदलाव आ रहे हैं। वहीं अब सिनेमा का फोकस बस्तर की कहानियों पर आ गया है..
ताबीर हुसैन. राज्य गठन के 25 साल पूरे होने के साथ ही छत्तीसगढ़ी सिनेमा ( CG Film) भी अपनी सिल्वर जुबली मना रहा है। ढाई दशक की इस यात्रा में जहां तकनीक और कथानक में बदलाव आया है, वहीं अब सिनेमा का फोकस बस्तर की कहानियों पर आ गया है। यहां की धरती, संस्कृति और संघर्ष अब बड़े परदे पर आकार लेने लगे हैं। चार नई फिल्में इसी कड़ी को आगे बढ़ा रही हैं आरजे बस्तर’, ‘दण्डाकोटुम’ और ‘ढोलकल’।
‘दण्डाकोटुम’ में निर्देशक अमलेश नागेश खुद लीड रोल निभा रहे हैं। फिल्म में आदिवासियों का संघर्ष और पलायन की पीड़ा दिखाई जाएगी।
‘ढोलकल’ का निर्देशन हिमांशु वर्मा ने किया है। फिल्म ढोलकल गणपति की ऐतिहासिक और पौराणिक पृष्ठभूमि को आधार बनाती है।
अविनाश प्रसाद निर्देशित माटी में बस्तर अंचल की आदिवासी संस्कृति की गूंज और साथ ही जल जंगल और ज़मीन के नाम पर सम्पदाओं की हो रही लूट का चित्रण किया गया है।
‘आरजे बस्तर’ की शूटिंग चल रही है। मनीष मानिकपुरी के निर्देशन में बनी यह फिल्म लॉकडाउन के दौरान लिखी कहानी पर आधारित है। इसमें स्थानीय के साथ-साथ बॉलीवुड कलाकार भी नजर आएंगे।