
CG News: छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत मिलने वाली सरकारी सहायता का लाभ अब बिना पहचान सत्यापन के नहीं मिलेगा। योजना में पारदर्शिता लाने और फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार ने आधार आधारित पहचान अनिवार्य कर दी है। अब योजना का लाभ लेने वाली बेटियों को आधार नंबर का प्रमाण देना होगा या आधार प्रमाणीकरण की प्रक्रिया से गुजरना होगा। महिला एवं बाल विकास विभाग ने 28 अक्टूबर को इस संबंध में अधिसूचना जारी की है।
योजना के तहत पात्र परिवारों की बेटियों को 35 हजार रुपए की आर्थिक सहायता बैंक खाते या डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से दी जाती है। इसके अलावा 7 हजार रुपए तक की सामग्री सहायता भी प्रदान की जाती है। नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सहायता सही हितग्राही तक पहुंचे और एक ही व्यक्ति के नाम पर दोबारा लाभ लेने जैसी गड़बड़ियों की आशंका कम हो।
नई व्यवस्था के तहत मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का लाभ लेने वाली युवतियों की पहचान आधार के माध्यम से प्रमाणित की जाएगी। आवेदन के समय आधार नंबर का प्रमाण देना या आधार प्रमाणीकरण कराना जरूरी होगा। इससे फर्जी पहचान के आधार पर योजना का लाभ लेने और एक ही हितग्राही के नाम पर दोहरा भुगतान होने की संभावना कम करने में मदद मिलेगी।
आधार सत्यापन के दौरान तकनीकी परेशानी आने पर पात्र हितग्राहियों के लिए दूसरे विकल्प भी रखे गए हैं। कई बार उंगलियों के निशान स्पष्ट नहीं होने के कारण बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं हो पाता। ऐसी स्थिति में सबसे पहले आइरिस स्कैन यानी आंखों की पुतली के जरिए पहचान और फेस ऑथेंटिकेशन का विकल्प दिया जाएगा।
यदि इन तरीकों से भी सत्यापन नहीं हो पाता है तो जहां संभव और स्वीकार्य होगा, वहां ओटीपी या टीओटीपी के जरिए पहचान की जा सकेगी। इन सभी विकल्पों से सत्यापन नहीं होने पर आधार कार्ड पर छपे क्यूआर कोड को स्कैन करके उसकी प्रामाणिकता जांची जाएगी।
सरकार की इस नई व्यवस्था से योजना में होने वाली कुछ संभावित गड़बड़ियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। फर्जी नाम से लाभ लेना: आधार प्रमाणीकरण से आवेदन करने वाली युवती की पहचान की पुष्टि हो सकेगी। एक ही हितग्राही को दोहरा भुगतान: आधार आधारित पहचान से एक ही व्यक्ति के अलग-अलग नाम या पहचान से दोबारा लाभ लेने की आशंका कम होगी। दूसरे व्यक्ति के जरिए भुगतान: हितग्राही की पहचान और बैंक खाते से जुड़ी सत्यापन प्रक्रिया मजबूत होने से गलत व्यक्ति के नाम पर सहायता लेने की संभावना कम की जा सकेगी।
जिन युवतियों के पास अभी आधार नंबर नहीं है, उन्हें योजना में पंजीयन कराने से पहले आधार नामांकन के लिए आवेदन करना होगा। आधार नंबर आवंटित होने तक नामांकन पर्ची के साथ निर्धारित फोटोयुक्त पहचान दस्तावेजों में से कोई एक प्रस्तुत करना होगा। इन दस्तावेजों में बैंक या डाकघर की फोटोयुक्त पासबुक, पैन कार्ड, पासपोर्ट, राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, मनरेगा कार्ड, किसान फोटो पासबुक, ड्राइविंग लाइसेंस और राजपत्रित अधिकारी या तहसीलदार की ओर से जारी फोटोयुक्त पहचान पत्र शामिल हैं।
अधिसूचना के अनुसार, संबंधित ब्लॉक, तहसील या जिले में आधार नामांकन केंद्र उपलब्ध नहीं होने पर महिला एवं बाल विकास विभाग यूआईडीएआई के रजिस्ट्रार के समन्वय से सुविधाजनक स्थान पर नामांकन की व्यवस्था करेगा। इसके साथ ही विभाग को योजना की नई प्रक्रिया और आधार सत्यापन से जुड़े नियमों का हितग्राहियों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार भी करना होगा। इस नई व्यवस्था के जरिए सरकार का प्रयास है कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की सहायता पारदर्शी तरीके से पात्र परिवारों तक पहुंचे और फर्जी पहचान या दोहरे लाभ की आशंका को कम किया जा सके।