
Chhattisgarh News: राहुल जैन की रिपोर्ट. छत्तीसगढ़ में 2028 के विधानसभा चुनाव की जमीन अभी से तैयार होने लगी है। चुनाव में करीब 27 महीने का समय बाकी है, लेकिन भाजपा और कांग्रेस ने प्रदेश संगठन की कमान नए प्रभारियों को सौंपकर संकेत दे दिया है कि अगला चुनाव अंतिम छह महीने की लड़ाई नहीं होगा। दोनों दलों के पास नए प्रभारियों को प्रदेश की राजनीतिक परिस्थितियां समझने, अपनी टीम तैयार करने, संगठन को बूथ तक सक्रिय करने और मुद्दों को चुनावी नैरेटिव में बदलने के लिए लंबा समय है।
भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी को और कांग्रेस ने सांसद सुखदेव भगत को प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया है। 2023 के चुनाव में भाजपा ने 54 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि कांग्रेस 35 सीटों पर सिमट गई थी। दोनों दलों के सामने अब अपनी मौजूदा स्थिति को बनाए रखने और कमजोर सीटों पर पकड़ मजबूत करने की चुनौती है।
2028 के चुनाव की सबसे महत्वपूर्ण लड़ाई अभी सीटों की नहीं, नैरेटिव और संगठन की है। भाजपा के पास सरकार और संगठन की ताकत है, लेकिन उसे सरकार के खिलाफ बनने वाले स्थानीय असंतोष को संभालना होगा। कांग्रेस के पास विपक्ष की भूमिका और सरकार के खिलाफ मुद्दे हैं, लेकिन उसे इन मुद्दों को वोट में बदलने के लिए संगठन को मजबूत करना होगा। नए प्रभारियों के लिए इसलिए शुरुआती 12-18 महीने बेहद महत्वपूर्ण होंगे। उन्हें सिर्फ दिल्ली और रायपुर के राजनीतिक समीकरण नहीं, बल्कि 90 विधानसभा क्षेत्रों की अलग-अलग राजनीतिक जरूरतों को समझना होगा। वर्ष 2026 में ही दोनों दलों की गतिविधियां इस ओर इशारा कर रही हैं कि 2028 का चुनाव आखिरी साल में अचानक तेज होने वाला अभियान नहीं होगा। जून में आई रिपोर्ट के अनुसार दोनों दल बूथ स्तर और विधानसभा क्षेत्रवार रणनीति पर काम शुरू कर चुके थे।
भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकार और संगठन के बीच तालमेल बनाए रखने की होगी। 2023 में पार्टी ने 90 में से 54 सीटें जीती थीं, लेकिन 36 सीटों पर उसे हार मिली थी। पार्टी इन सीटों के साथ बूथवार प्रदर्शन की समीक्षा और कमजोर क्षेत्रों में संगठन मजबूत करने पर पहले से काम कर रही है। नई प्रभारी स्मृति ईरानी के सामने प्रदेश संगठन की मौजूदा टीम, सरकार और अलग-अलग क्षेत्रों के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के बीच तालमेल बैठाने की चुनौती होगी। सेवा संकल्प अभियान के जरिए भाजपा 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक जनसेवा और लाभार्थियों तक पहुंच का अभियान चला रही है।
कांग्रेस के नए प्रभारी सुखदेव भगत के सामने स्थिति कुछ अलग है। पार्टी को 2023 की हार के बाद संगठन को फिर से सक्रिय करना है और कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक जोड़ना है। हालांकि कांग्रेस ने इसी दिशा में संगठन सृजन अभियान शुरू किया है। जिला और ब्लॉक स्तर के नेताओं और मास्टर ट्रेनरों का प्रशिक्षण हुआ, जिसका उद्देश्य ब्लॉक से बूथ तक संगठन को मजबूत करना था।