
Chhattisgarh Politics: छत्तीसगढ़ में भारतीय जनता पार्टी के नए प्रदेश प्रभारी की नियुक्ति को लेकर एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधायक अजय चंद्राकर ने संकेत दिया है कि अन्य राज्यों की तरह छत्तीसगढ़ में भी जल्द ही भाजपा प्रभारी की नियुक्ति हो सकती है। उन्होंने कहा कि प्रभारी नियुक्त करने का अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पास है और वे जब उचित समझेंगे, सोच-समझकर फैसला ले सकते हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि जो भी प्रभारी आएगा, अच्छा ही होगा।
मीडिया से बातचीत के दौरान अजय चंद्राकर से छत्तीसगढ़ में भाजपा प्रभारी की नियुक्ति को लेकर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि अन्य प्रदेशों की तरह यहां भी जल्द प्रभारी नियुक्त किया जा सकता है। उन्होंने इसे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का विशेषाधिकार बताया।
चंद्राकर के मुताबिक, राष्ट्रीय अध्यक्ष जब उचित समझेंगे, तब इस संबंध में फैसला करेंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व किसी भी नियुक्ति पर सोच-समझकर निर्णय लेता है। उन्होंने यह भी कहा कि नया प्रभारी जो भी आएगा, अच्छा ही होगा। उनके इस बयान के बाद प्रदेश भाजपा में नए प्रभारी की संभावित नियुक्ति को लेकर चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं। हालांकि, उन्होंने किसी नाम या नियुक्ति की निश्चित तारीख का खुलासा नहीं किया।
छत्तीसगढ़ में सरकार के ढाई साल पूरे होने के मौके पर मंत्रियों की ओर से की गई प्रेसवार्ताओं को लेकर कांग्रेस लगातार सरकार पर निशाना साध रही है। कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया कि भाजपा सरकार का विकास सिर्फ पोस्टरों में दिखाई देता है। कांग्रेस के इस तंज पर अजय चंद्राकर ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कांग्रेस के शासनकाल के विकास मॉडल पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस अपने समय के विकास को ही विकास मानती है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर कांग्रेस उसी को विकास समझती है, तो भगवान छत्तीसगढ़ को कांग्रेस से बचाए। चंद्राकर ने कांग्रेस के विकास मॉडल को अलग बताते हुए अपने अंदाज में सरकार के खिलाफ कांग्रेस के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस किस विषय में बात करेगी, यह भी देखना चाहिए।
अजय चंद्राकर ने कांग्रेस के शासनकाल पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस का विकास मॉडल अलग रहा है। उन्होंने अपने बयान में जेल से जुड़े मुद्दे का भी उल्लेख किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के समय जेल को तीर्थ स्थल की तरह माना जाता था और लोग वहां जाने में गर्व महसूस करते थे। उनके इस बयान को कांग्रेस के पूर्व शासनकाल में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक मामलों को लेकर चलने वाली बहस से जोड़कर देखा जा रहा है। चंद्राकर के बयान से साफ है कि सरकार के ढाई साल पूरे होने के मौके पर भाजपा और कांग्रेस के बीच विकास के मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।
छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की ओर से शिक्षा व्यवस्था को लेकर दिए गए बयान पर भी अजय चंद्राकर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को लेकर जो भी समस्याएं हैं, उन पर ध्यान दिया जाना चाहिए। उन्होंने शिक्षा से जुड़े विषय को केंद्र से संबंधित बताते हुए कहा कि पूरे देश में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही है। उन्होंने युवाओं के जागरूक होने की बात भी कही। चंद्राकर का कहना था कि शिक्षा के क्षेत्र में जो समस्याएं हैं, उन पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय ध्यान दिया जाना चाहिए। युवाओं की जागरूकता को देखते हुए शिक्षा जैसे विषय पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है।
शिक्षा मंत्री के सोशल मीडिया पर रील बनाने में व्यस्त रहने संबंधी दीपक बैज के बयान पर अजय चंद्राकर ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दीपक बैज को ‘रील का नेता’ बताते हुए कांग्रेस की आंतरिक राजनीति पर भी निशाना साधा। चंद्राकर ने कहा कि दीपक बैज को सार्वजनिक तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अपना नेता मानने में परेशानी होती है। उनके इस बयान के जरिए उन्होंने कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और गुटबाजी के मुद्दे को भी उठाने की कोशिश की।
सरकार के ढाई साल पूरे होने के साथ ही छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। एक ओर कांग्रेस सरकार के कामकाज और विकास को लेकर सवाल उठा रही है, तो दूसरी ओर भाजपा नेता पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल और उसके विकास मॉडल पर पलटवार कर रहे हैं। इसी राजनीतिक माहौल के बीच भाजपा प्रभारी की संभावित नियुक्ति का मुद्दा भी चर्चा में आ गया है। अजय चंद्राकर के बयान ने इस संभावना को और हवा दी है कि पार्टी जल्द ही छत्तीसगढ़ के लिए नए प्रभारी के नाम का ऐलान कर सकती है।
हालांकि, अंतिम निर्णय भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को ही लेना है। फिलहाल अजय चंद्राकर के बयान के तीन प्रमुख राजनीतिक संदेश सामने आए हैं। पहला, छत्तीसगढ़ में भाजपा प्रभारी की नियुक्ति जल्द हो सकती है। दूसरा, भाजपा सरकार के ढाई साल के कामकाज को लेकर कांग्रेस के हमलों का पार्टी नेता आक्रामक तरीके से जवाब दे रहे हैं। और तीसरा, शिक्षा व्यवस्था तथा कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर भी भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग आगे बढ़ सकती है।