
Chhattisgarh Dam Safety: प्रदेश में स्टॉप डैम और एनीकटों का गेट खोलकर या गेट को क्षति पहुंचकर अवैध रेत खनन की शिकायतें लगातार आती है। बीते साल 3 सितंबर को बलरामपुर के विश्रामनगर में बांध टूटा था। इसमें छह की मौत हो गई थी। अब ऐसे हालात न बने इसलिए जल संसाधन विभाग गाद निवारण नीति (डी-सिल्टेशन पॉलिसी) तैयार कर रहा है। प्रदेश में स्टॉप डैम और एनीकटों में लगातार जमा हो रही सिल्ट (गाद) की समस्या को दूर करने का प्रयास किया जाएगा। प्रदेश के कई बड़े बांध 100 साल से अधिक के हो गए हैं। ऐसे में सिल्ट जमा होने कई नुकसान उठाने पड़ रहे हैं। बांधों की सरंचना को भी खतरा पैदा हो रहा है।
नई नीति के लागू होने के बाद जल संरचनाओं में जमा सिल्ट को वैज्ञानिक और तकनीकी निगरानी में हटाया जाएगा। इससे न केवल अवैध रेत खनन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी, बल्कि सिंचाई सुविधा का भी विस्तार होगा। बता दें कि स्टॉप डैम और एनीकट में सिल्ट एक बड़ी परेशानी का कारण बनते जा रही है। केंद्र सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए अक्टूबर 2022 में राष्ट्रीय गाद फ्रेमवर्क जारी किया था। इसके बाद पंजाब, हरियाणा, असम, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश सहित अन्य राज्य नीति तैयार कर रहे हैं। वर्तमान में सिल्ट निकलाने के लिए अधीक्षण अभियंता की अनुमति जरूरी है। वो निरीक्षण और जांच के आधार पर सिल्ट निकालने की अनुमति दे सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार नदी के पानी के साथ मिट्टी और छोटे-छोटे कण भी बहते हुए आते हैं। जब स्टाॅप डैम बनाकर पानी को रोका जाता हैं, तो मिट्टी और छोटे-छोटे कण वहीं जमा हो जाते हैं। हर साल करीब 1 से 1.5 फीसदी सिल्ट जमा होती है। समय-समय पर इसे निकालना जरूरी है। यदि इसे नहीं निकाले तो जलभराव की क्षमता कम हो जाती है। इसका सीधा असर सिंचाई क्षमता पर भी पड़ता है।
ज्यादातर छोटे और मध्यम स्टाॅप डैम व एनीकट के गेट के साथ छेड़छाड़ की जाती है। अधिकांश जगह इसके लिए रेत माफिया मछुआरों की मदद लेते हैं। उनकी मदद से गेट को खोल देते हैं। इससे पूरा पानी बह जाता है। इसके बाद वे अवैध रेत का खनन करते हैं।
जल संसाधन विभाग अब इस समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। प्रस्तावित नीति के तहत दो स्तरीय समितियां बनाई जाएंगी। मेजर और मीडियम परियोजनाओं के लिए सचिव स्तर की समिति होगी, जबकि छोटे स्ट्रक्चर्स के लिए जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी। ये समितियां उन स्टॉप डैम और एनीकटों की पहचान करेंगी जहां बड़े स्तर पर सिल्ट जमा हो चुकी है। इसके बाद पारदर्शी प्रक्रिया के तहत टेंडर जारी किए जाएंगे और तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी में डी-सिल्टेशन का कार्य कराया जाएगा।
विश्रामनगर में बीते साल 3 सितंबर को बांध टूट गया था। बांध का पानी अपने साथ पूरे गांव का भरोसा भी बहा ले गया था। हादसे को एक साल बीत गए हैं लेकिन गांव की घड़ी उसी रात पर अटक गई है। हादसे में छह लोगों की मौत हो गई थी। आज भी एक बच्ची लापता है। गांव में उस रात जो लोग बच गए थे वे आज भी उसी खौफ के साथ जी रहे हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर एक नई नीति पर काम किया जा रहा। इसे तैयार कर कैबिनेट की बैठक में रखा जाएगा। यदि कैबिनेट से अनुमोदन मिलता है तो इसे लागू कर दिया जाएगा। इसके लागू होने के बाद जल संरचनाओं में जमा सिल्ट को वैज्ञानिक और तकनीकी निगरानी में हटाया जाएगा।
राजेश सुकुमार टोप्पो, सचिव, जल संसाधन विभाग