
Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक स्तर पर बदलाव करते हुए राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ 12 पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों की सेवाएं गृह विभाग को वापस कर दी गई हैं। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से आदेश जारी किया गया है। आदेश के मुताबिक, संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से वापस की गई हैं।
इस सूची में निरीक्षक, उप निरीक्षक, सहायक उप निरीक्षक और आरक्षक स्तर के पुलिसकर्मी शामिल हैं। शासन की ओर से जारी दो अलग-अलग आदेशों में सभी 12 अधिकारी-कर्मचारियों के नाम दर्ज हैं। इस कार्रवाई के बाद EOW-ACB में प्रतिनियुक्ति पर तैनात इन पुलिसकर्मियों की सेवाएं अब गृह विभाग को वापस हो गई हैं।
सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी पहले आदेश में पांच निरीक्षकों के नाम शामिल हैं। इनमें वीरेंद्र चंद्रा, शरद चंद्रा, बृजेश कुशवाहा, संतराम सोनी और उमेंद्र टंडन शामिल हैं। इन सभी की सेवाएं EOW-ACB से वापस लेकर गृह विभाग को सौंपने का आदेश जारी किया गया है।
वहीं, दूसरे आदेश में सात पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों के नाम शामिल हैं। इनमें निरीक्षक पौरुष पुर्रे और सौरभ द्विवेदी, उप निरीक्षक जितेंद्र नंदे, सहायक उप निरीक्षक निर्भय लाल ध्रुव तथा आरक्षक अभिषेक कुमार, रितेश दीवान और सोहन ध्रुव शामिल हैं। इस तरह दोनों आदेशों को मिलाकर कुल 12 पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों की सेवाएं गृह विभाग को वापस की गई हैं।
जारी सूची में अलग-अलग पदों पर कार्यरत पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया है। इसमें निरीक्षक स्तर के अधिकारियों के साथ उप निरीक्षक, सहायक उप निरीक्षक और आरक्षक भी हैं। इससे स्पष्ट है कि यह आदेश केवल किसी एक पद या स्तर तक सीमित नहीं है। प्रतिनियुक्ति पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं वापस किए जाने के बाद उनकी आगे की पदस्थापना को लेकर अलग से आदेश जारी होने पर स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सामान्य प्रशासन विभाग ने उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से गृह विभाग को वापस करने का आदेश दिया है।
EOW और ACB में आर्थिक अपराधों तथा भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच की जाती है। इन एजेंसियों में पुलिस विभाग के अधिकारी-कर्मचारी प्रतिनियुक्ति पर तैनात रहते हैं। संबंधित 12 अधिकारी-कर्मचारियों की सेवाएं वापस करने का फैसला सामान्य प्रशासन विभाग के जारी आदेशों के जरिए लागू किया गया है। हालांकि, आदेश में सेवाएं वापस करने के पीछे किसी विशेष कारण का उल्लेख उपलब्ध जानकारी में नहीं है। इसलिए इसे किसी कार्रवाई, जांच या विभागीय विवाद से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।