MSP Issue in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ है। उत्पादन घटकर लगभग आधा रह गया है, जिससे किसानों की आय पर गंभीर असर पड़ा है। किसान अब मुआवजे और राहत की उम्मीद कर रहे हैं।
Wheat Farmers Crisis: छत्तीसगढ़ में गेहूं उत्पादक किसानों को इस बार बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। खेतों में खड़ी फसल खराब होने से न केवल गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित हुई है, बल्कि उत्पादन भी लगभग आधा रह गया है। सामान्य परिस्थितियों में जहां प्रति एकड़ 12 से 14 क्विंटल तक उत्पादन होता था, वहीं इस बार यह घटकर 6 से 8 क्विंटल तक ही पहुंच गया है। इससे किसानों की आय पर गंभीर असर पड़ा है और वे आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। किसानों को मुआवजे की उम्मीद है।
फसल खराब होने के बाद किसानों को अब खुले बाजार में औने-पौने दामों पर गेहूं बेचना पड़ रहा है। किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले गेहूं के लिए भी केवल 2100 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल तक ही मिल रहे हैं, जबकि बाजार में यही गेहूं 3800 से 4000 रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। इससे किसानों में भारी नाराजगी है।
सरकारी खरीदी व्यवस्था नहीं होने के कारण किसान पूरी तरह बिचौलियों और कोचियों पर निर्भर हो गए हैं। ये व्यापारी गांव-गांव पहुंचकर कम दामों पर उपज खरीद रहे हैं और परिवहन व गुणवत्ता के नाम पर 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल तक की कटौती भी की जा रही है। इससे किसानों को प्रति क्विंटल लगभग 800 रुपये तक का नुकसान हो रहा है।
छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक रवि प्रकाश ताम्रकार के अनुसार, इस स्थिति में किसानों को प्रति एकड़ लगभग 6 हजार रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में गेहूं का उचित समर्थन मूल्य कम से कम 3100 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए।
किसानों ने मांग की है कि मध्यप्रदेश की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी गेहूं की सरकारी खरीदी और समर्थन मूल्य व्यवस्था लागू की जाए। उनका कहना है कि यदि सरकार सीधे खरीदी करे तो किसानों को उचित दाम मिल सकता है और बिचौलियों की भूमिका खत्म हो सकती है।
किसानों का कहना है कि राज्य में धान के विकल्प के रूप में ग्रीष्मकालीन गेहूं उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन उसके अनुरूप खरीदी व्यवस्था नहीं है। इससे किसान योजनाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। साथ ही फसल बीमा और प्राकृतिक आपदा राहत योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी सवाल उठ रहे हैं।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN) के तहत देश के सभी पात्र किसानों को हर वर्ष ₹6,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि तीन समान किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाती है। इस योजना का उद्देश्य किसानों को छोटी-मोटी कृषि जरूरतों और घरेलू खर्चों में आर्थिक सहयोग प्रदान करना है, ताकि उनकी आय में स्थिरता लाई जा सके।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-KISAN) के तहत देश के सभी पात्र किसानों को हर वर्ष ₹6,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि तीन समान किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाती है। इस योजना का उद्देश्य किसानों को छोटी-मोटी कृषि जरूरतों और घरेलू खर्चों में आर्थिक सहयोग प्रदान करना है, ताकि उनकी आय में स्थिरता लाई जा सके।
राजीव गांधी किसान न्याय योजना छत्तीसगढ़ सरकार की एक महत्वपूर्ण इनपुट सब्सिडी योजना है। इस योजना के तहत किसानों को धान उत्पादन के आधार पर प्रति एकड़ अतिरिक्त आर्थिक सहायता दी जाती है। इसका उद्देश्य खेती की लागत को कम करना और किसानों की आय में वृद्धि करना है, ताकि उन्हें बेहतर लाभ मिल सके और वे कृषि कार्य को अधिक सशक्त तरीके से जारी रख सकें।
4. फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana)
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana) के तहत किसानों को बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, सूखा और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले फसल नुकसान पर आर्थिक मुआवजा दिया जाता है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को खेती में होने वाले जोखिम से सुरक्षा प्रदान करना है, ताकि फसल खराब होने की स्थिति में उनकी आय पर अधिक असर न पड़े और उन्हें समय पर राहत मिल सक
कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत किसानों को ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और अन्य आधुनिक कृषि उपकरणों पर सरकार द्वारा सब्सिडी प्रदान की जाती है। इस योजना का उद्देश्य खेती को आधुनिक बनाना और श्रम व समय की बचत करना है। इससे किसानों की उत्पादन लागत कम होती है और कृषि कार्य अधिक आसान एवं प्रभावी तरीके से किया जा सकता है।
सिंचाई और जल संरक्षण योजनाओं के तहत किसानों को खेत तालाब, ड्रिप इरिगेशन और बोरवेल जैसी सुविधाओं के लिए सहायता प्रदान की जाती है। इन योजनाओं का उद्देश्य कृषि के लिए पानी की उपलब्धता को बढ़ाना और जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना है। इससे किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलती है, फसल उत्पादन में सुधार होता है और सूखा जैसी परिस्थितियों के प्रभाव को कम किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री कृषक समग्र विकास योजना के तहत किसानों के समग्र विकास पर ध्यान दिया जाता है। इस योजना में खेती के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और अन्य सहायक गतिविधियों को बढ़ावा देकर किसानों की आय बढ़ाने का प्रयास किया जाता है। इसका उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और किसानों को आय के वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध कराना है, ताकि वे केवल खेती पर निर्भर न रहें और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके।
इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से सामने आता है कि MSP (समर्थन मूल्य) और सरकारी खरीदी व्यवस्था पूरी तरह मजबूत न होने के कारण किसान अपनी उपज बेचने के लिए सीधे खुले बाजार पर निर्भर हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें अक्सर बिचौलियों के माध्यम से कम दामों पर फसल बेचनी पड़ती है, जिससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ता है।
भले ही सरकार की ओर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, सिंचाई सहायता और कृषि यंत्रीकरण जैसी कई योजनाएं संचालित की जा रही हों, लेकिन जब तक फसल की सुनिश्चित खरीद और उचित मूल्य की गारंटी नहीं मिलती, तब तक इन योजनाओं का पूरा लाभ किसानों तक नहीं पहुंच पाता। इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती है, बल्कि कृषि क्षेत्र में असंतोष भी बढ़ता है। यही कारण है कि किसान लंबे समय से मजबूत खरीदी व्यवस्था और बेहतर MSP क्रियान्वयन की मांग कर रहे हैं।