रायपुर

शहरों की व्यवस्था संभालने वाले निगमों में ही स्टाफ की कमी, छत्तीसगढ़ के 14 नगर निगमों में 1127 पद खाली

Chhattisgarh Recruitment News: छत्तीसगढ़ के 14 नगर निगमों में 1,127 पद खाली हैं। 266 पदों पर भर्ती के प्रस्ताव में वित्त विभाग ने सिर्फ 85 पदों को मंजूरी दी।
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Oct 14, 2026
Chhattisgarh Nagar Nigam Vacancy
छत्तीसगढ़ के 14 नगर निगमों में 1127 पद खाली (Photo Source- Patrika File Photo)

Chhattisgarh Nagar Nigam Vacancy: छत्तीसगढ़ के शहरों की व्यवस्था संभालने वाले नगर निगम इन दिनों कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं। प्रदेश के 14 नगर निगमों में स्वीकृत 1,465 पदों में से 1,127 पद खाली हैं। यानी नगर निगमों में करीब 77 प्रतिशत पदों पर कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं हुई है। इसका असर संपत्ति कर की वसूली, राजस्व से जुड़े काम, अवैध निर्माण की निगरानी और विकास कार्यों की जांच जैसी जिम्मेदारियों पर पड़ रहा है।

कर्मचारियों की कमी के बीच खाली पदों को भरने के लिए भर्ती का प्रस्ताव भी भेजा गया था, लेकिन 266 पदों पर भर्ती की मांग के मुकाबले वित्त विभाग ने केवल 85 पदों के लिए सहमति दी है। ऐसे में नगर निगमों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने और कामकाज को सुचारु बनाने की चुनौती बनी हुई है।

1127 Vacant Posts: 14 नगर निगमों में 1,127 पद खाली

नगर निगमों में अलग-अलग श्रेणियों के पद लंबे समय से रिक्त हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राजस्व निरीक्षक, सहायक राजस्व निरीक्षक, सहायक वर्ग-3 और उप अभियंता जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कर्मचारियों की कमी है। इन पदों पर काम करने वाले कर्मचारी शहरों में राजस्व वसूली से लेकर निर्माण कार्यों की निगरानी तक की जिम्मेदारी निभाते हैं।

स्वीकृत पदों और रिक्तियों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति की गंभीरता सामने आती है। कुल 1,465 स्वीकृत पदों में से केवल 338 पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 1,127 पद खाली हैं। कर्मचारियों की इतनी बड़ी कमी के कारण मौजूदा अमले पर काम का दबाव बढ़ना स्वाभाविक है।

राजस्व निरीक्षक से लेकर उप अभियंता तक पद खाली

नगर निगमों में राजस्व और तकनीकी कामकाज से जुड़े पदों पर बड़ी संख्या में रिक्तियां हैं।

  • राजस्व निरीक्षक के 92 स्वीकृत पदों में से 52 खाली हैं।
  • सहायक राजस्व निरीक्षक के 436 पदों में से 274 रिक्त हैं।
  • सहायक वर्ग-3 के 593 पदों में से 500 खाली हैं।
  • उप अभियंता के 336 स्वीकृत पदों में से 194 पद रिक्त हैं।

इन आंकड़ों से साफ है कि नगर निगमों में केवल एक विभाग नहीं, बल्कि प्रशासनिक, राजस्व और तकनीकी कामकाज से जुड़े कई स्तरों पर कर्मचारियों की कमी है। इसका असर रोजमर्रा के कामों के साथ-साथ शहरों में चल रहे विकास कार्यों की निगरानी पर भी पड़ सकता है।

रायपुर, बिलासपुर और भिलाई में भी कर्मचारियों की कमी

प्रदेश के प्रमुख नगर निगमों में भी बड़ी संख्या में पद खाली हैं। राजधानी रायपुर नगर निगम में 344 स्वीकृत पदों में से 241 पद रिक्त हैं। वहीं, भिलाई नगर निगम में 113 और दुर्ग नगर निगम में 121 पद खाली हैं। बिलासपुर नगर निगम की स्थिति भी चिंताजनक है। यहां 230 स्वीकृत पदों में से 160 पदों पर नियुक्ति नहीं हुई है। यानी बिलासपुर में करीब 68 प्रतिशत पद खाली हैं। बड़े शहरों में कर्मचारियों की कमी होने से नागरिक सेवाओं और निगम के नियमित कामकाज पर दबाव बढ़ सकता है।

संपत्ति कर वसूली और अवैध निर्माण की निगरानी पर असर

नगर निगमों में राजस्व निरीक्षक और सहायक राजस्व निरीक्षक जैसे पद संपत्ति कर की वसूली और राजस्व से जुड़े कामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन पदों पर कर्मचारियों की कमी होने से कर निर्धारण, वसूली और संबंधित मामलों के निपटारे में दिक्कतें आ सकती हैं।

इसी तरह, तकनीकी पदों पर कर्मचारियों की कमी का असर निर्माण कार्यों की जांच, गुणवत्ता की निगरानी और अवैध निर्माण पर कार्रवाई जैसे कामों पर पड़ सकता है। सहायक वर्ग-3 के कर्मचारियों की कमी से कार्यालयों में दस्तावेजों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े काम भी प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, रिक्त पदों की संख्या के आधार पर हर काम में देरी होने की पुष्टि नहीं की जा सकती, लेकिन इतने बड़े स्तर पर कर्मचारियों की कमी नगर निगमों के कामकाज के लिए एक बड़ी चुनौती है।

266 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव, 85 को ही सहमति

खाली पदों को भरने के लिए भर्ती का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा गया था। इसमें 266 पदों पर नियुक्ति की मांग की गई थी, लेकिन वित्त विभाग ने इनमें से केवल 85 पदों पर भर्ती के लिए सहमति दी है। इससे फिलहाल भर्ती के जरिए कर्मचारियों की कमी दूर करने की गुंजाइश सीमित नजर आ रही है। नगर निगमों में बड़ी संख्या में पद रिक्त होने के कारण सभी जरूरी जिम्मेदारियों को संभालने के लिए पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध कराना विभाग के सामने अहम चुनौती बना हुआ है।

आउटसोर्सिंग से भी काम चलाने की कोशिश

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक नीलेश कुमार महादेव क्षीरसागर के अनुसार, खाली पदों को भरने के लिए वित्त विभाग को प्रस्ताव भेजा गया था। कुछ पदों पर सहमति मिली है। कर्मचारियों की कमी को दूर करने और कामकाज को प्रभावित होने से बचाने के लिए आउटसोर्सिंग के माध्यम से भी नियुक्तियां की गई हैं। विभाग की ओर से वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए कामकाज चलाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन नगर निगमों में बड़ी संख्या में नियमित पद खाली होने के कारण भर्ती की जरूरत बनी हुई है।

Chhattisgarh Government Jobs: शहरों की व्यवस्था के लिए कर्मचारियों की कमी बड़ी चुनौती

नगर निगमों की जिम्मेदारी केवल सफाई, सड़क और पानी जैसी नागरिक सुविधाओं तक सीमित नहीं है। संपत्ति कर वसूली, शहरी विकास योजनाओं का क्रियान्वयन, निर्माण कार्यों की निगरानी और प्रशासनिक कामकाज भी इन्हीं संस्थाओं के जिम्मे हैं। ऐसे में कर्मचारियों की कमी का असर कई विभागों और सेवाओं पर पड़ सकता है।

छत्तीसगढ़ के 14 नगर निगमों में 1,127 पद खाली होने और 266 पदों पर भर्ती के प्रस्ताव में से केवल 85 को सहमति मिलने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आगे कितने पदों पर नियुक्तियां होती हैं। नियमित भर्ती और पर्याप्त कर्मचारियों की उपलब्धता से ही नगर निगमों के कामकाज को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

Updated on:
14 Oct 2026 06:23 pm
Published on:
14 Oct 2026 06:23 pm
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