
रायपुर . किडनी की रहस्यमय बीमारी से प्रभावित गरियाबंद के सुपेबेड़ा गांव में प्रशासन ने जिस बोरिंग में आर्सेनिक रिमूवल प्लांट लगाया है, वह सूख गए हैं। एेसे में करीब 64 लाख रुपए के उस प्लांट का मकसद ही खतरे में पड़ गया है।
वह पंप दोपहर में शुरू हो पाता है। एेसे में लोग फिर से पुराने पंपों का इस्तेमाल करने लगे हैं, जिसके पानी में खतरनाक धातुएं हैं। पत्रिका से बातचीत में ग्रामीणों ने बताया कि उच्च न्यायालय की टीम के लौटने के बाद बोरिंग खोदने वाली एक मशीन फिर से गांव में पहुंची है।
गांव में अभी 264 मरीज : जांच दल को बताया गया कि गांव में अभी भी 264 मरीज किडनी की बीमारी से परेशान हैं। उसके अलावा बच्चों की त्वचा और दांतों पर भी खतरनाक आर्सेनिक और फ्लोराइड ने असर डाला है। जांच दल ने मरीजों और बच्चों से भी मुलाकात कर उनके ईलाज का विवरण जाना। ग्रामीणों ने बताया कि रायपुर मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान दवा नहीं मिलती।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव में अभी तक 112 लोगों की मौत किडनी की बीमारी से हो चुकी है। सरकार 62 मौतें स्वीकार कर रही है। मुख्यमंत्री ने लोक सुराज के समय मृतकों के परिजनों को 50 हजार रुपया देने की घोषणा की थी। यह राशि अभी तक नहीं मिली है।