
Chhattisgarh Crime News: पुलिस विभाग के बर्खास्त सिपाही की एक और करतूत सामने आई है। उसने बेरोजगार युवक-युवतियों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया। इसके बाद उनसे लाखों रुपए वसूल लिया। रकम लेने के बाद उन्हें फर्जी ज्वाइनिंग लेटर तक जारी कर दिया। बाद में किसी को नौकरी नहीं दिलवाई। पीड़ितों ने इसकी शिकायत कोतवाली थाने में की। आरोपी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई के एक मामले में पहले से ही जेल में है।
पुलिस के मुताबिक देवेंद्र कुमार वर्मा का माध्यमिक शिक्षा मंडल आना-जाना होता था। इस दौरान वहां बर्खास्त सिपाही इमरान कादरी से उसकी मुलाकात हुई। इमरान ने खुद को पुलिस विभाग में सिपाही बताया। इसके बाद दुर्ग महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलसचिव से अपनी पहचान होने का दावा करते हुए बताया कि वहां सहायक ग्रेड, प्रयोगशाला तकनीशियन, भृत्य आदि पदों पर भर्ती निकली है।
इसमें वह बैकडेट में आवेदन करवाकर नौकरी लगवा सकता है। इसके एवज में 5 लाख रुपए लगेंगे। देवेंद्र उसकी बातों में आ गया। देवेंद्र के अलावा प्रीतेश वर्मा, छाया वर्मा, राहुल साहू को सहायक ग्रेड-3 और सुषमा साहू को प्रयोगशाला तकनीशियन, संजू साहू को भृत्य के लिए आवेदन भरवाया। इसके बाद सभी से कुल 25 लाख रुपए ले लिए।
आरोपी ने पीड़ितों को 30 मई को नियुक्ति पत्र दिया। इसे लेकर सभी युवक-युवती 5 जून को कृषि महाविद्यालय कार्यभार ग्रहण करने पहुंचे। कॉलेज के अधिकारियों ने नियुक्ति पत्रों को फर्जी और कूटरचित बताया। इससे पीड़ितों को ठगी होने का एहसास हुआ। इसके बाद पीड़ितों ने कोतवाली थाने में शिकायत की।
आरोपी इमरान को वर्ष 2010 में पुलिस विभाग से बर्खास्त कर दिया गया है। इसके बावजूद वह कई जगह खुद को पुलिस वाला ही बताता है। उसके खिलाफ दुर्ग, सिमगा, रायपुर में अलग-अलग 8 केस दर्ज हो चुके हैं। इसमें नौकरी के नाम पर ठगी, ब्लैकमेलिंग, जुआ आदि के केस शामिल हैं।
आरोपी इमरान को कोतवाली पुलिस ने कुछ दिन पहले एक अन्य मामले में प्रतिबंधात्मक कार्रवाई में जेल भेजा था। अब धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ है। इस मामले में भी उसकी अलग से गिरफ्तारी की जाएगी। उल्लेखनीय है कि करीब तीन साल पहले तेलीबांधा थाने में गांजा तस्करों को लेन-देन करके छोड़ने का एक कथित ऑडियो भी वायरल हुआ था। इसमें इमरान और थाने में पदस्थ दूसरे विभाग के सिपाही की बातचीत थी।