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Chhattisgarh Job Scam: सरकारी नौकरी के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा, 1.5 करोड़ की ठगी में शिक्षक और क्लर्क गिरफ्तार

Chhattisgarh Job Scam: रायपुर में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 34 लोगों से करीब 1.5 करोड़ रुपए की ठगी का खुलासा हुआ है। पुलिस ने मामले में एक शिक्षक और एक क्लर्क को गिरफ्तार किया है।

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सरकारी नौकरी के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा (photo source- Patrika)

सरकारी नौकरी के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा (photo source- Patrika)

Chhattisgarh Job Scam: छत्तीसगढ़ के रायपुर ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी नौकरी के नाम पर की गई एक बड़ी ठगी का खुलासा हुआ है, जिसमें 34 लोगों को फर्जी नियुक्ति पत्र देकर करीब 1.5 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की गई। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक सरकारी शिक्षक और दूसरा प्राइवेट स्कूल का क्लर्क शामिल है। इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ बेरोजगार युवाओं को झकझोर कर रख दिया है, बल्कि सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

Chhattisgarh Job Scam: कैसे सामने आया मामला?

इस मामले का खुलासा तब हुआ जब प्रार्थी राजपाल बघेल ने 24 अप्रैल को राखी थाना में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया, खासतौर पर व्हाट्सएप के जरिए एक फर्जी आदेश तेजी से फैलाया जा रहा था। यह आदेश सामान्य प्रशासन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के नाम से जारी बताया गया था, जिसकी तारीख 5 मार्च दर्शाई गई थी। आदेश में परिवहन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन, वन एवं जलवायु परिवर्तन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास और स्कूल शिक्षा विभाग में नियुक्तियों की अनुशंसा का दावा किया गया था।

पहली नजर में यह आदेश पूरी तरह असली प्रतीत होता था, क्योंकि इसमें सचिव और उप सचिव के डिजिटल हस्ताक्षर का दुरुपयोग किया गया था। इसी का फायदा उठाकर आरोपियों ने लोगों को भरोसे में लिया और नौकरी दिलाने का झांसा देकर उनसे मोटी रकम वसूली।

पुलिस ने दर्ज किया केस

शिकायत के आधार पर थाना राखी में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 76/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक रायपुर ग्रामीण के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया, जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण और नगर पुलिस अधीक्षक नवा रायपुर के मार्गदर्शन में जांच आगे बढ़ाई गई।

तकनीकी जांच से मिली बड़ी सफलता

पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रेल की मदद से व्हाट्सएप पर प्रसारित फर्जी आदेश के स्रोत का पता लगाया। जांच के दौरान आरोपी की पहचान राजेश शर्मा उर्फ राजू के रूप में हुई, जिसकी लोकेशन डोंगरगढ़ में पाई गई। टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए वहां पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में राजेश शर्मा ने चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि कर्ज में डूबने के कारण उसने यह ठगी की योजना बनाई थी। लोगों की नौकरी पाने की मजबूरी का फायदा उठाते हुए उसने सरकारी विभाग के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र तैयार किए और उन्हें सोशल मीडिया के जरिए फैलाया।

साथी के साथ मिलकर रची साजिश

इस पूरे षड्यंत्र में राजेश शर्मा ने अपने साथी मनोज कुमार श्रीवास्तव को भी शामिल किया, जो एक निजी स्कूल में क्लर्क है। दोनों ने मिलकर कंप्यूटर के जरिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए और उन्हें असली जैसा दिखाने के लिए सरकारी प्रारूप और डिजिटल सिग्नेचर का इस्तेमाल किया। इसके बाद इन दस्तावेजों को व्हाट्सएप पर भेजकर लोगों से संपर्क किया गया और उनसे नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे ऐंठे गए।

ठगी का शिकार हुए कई लोग

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने 34 लोगों को अपना शिकार बनाया और उनसे कुल मिलाकर लगभग 1.5 करोड़ रुपए की ठगी की। एक मामले में भिलाई की एक महिला से 1,90,000 रुपए लिए गए थे, जिसे बाद में शिकायत की भनक लगने पर वापस कर दिया गया। इसके बाद आरोपियों ने फर्जी आदेश को आगे प्रसारित करना बंद कर दिया, लेकिन तब तक कई लोग उनकी ठगी का शिकार हो चुके थे।

Chhattisgarh Job Scam: पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी

पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से कंप्यूटर, प्रिंटर और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं, जिनका इस्तेमाल फर्जी दस्तावेज बनाने में किया जा रहा था। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2), 336(3), 3(5) और आईटी एक्ट की धारा 66(डी) भी जोड़ी गई हैं।

सावधानी बरतने की जरूरत

यह मामला एक बार फिर यह साबित करता है कि सरकारी नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी से सतर्क रहना बेहद जरूरी है। आज के डिजिटल दौर में फर्जी दस्तावेज बनाना आसान हो गया है, इसलिए किसी भी नियुक्ति या ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि करना जरूरी है।