रायपुर

Diwali Lakshmi Puja Muhurat 2026: लक्ष्मी-गणेश और कुबेर पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है? जानें सही समय और विधि

Diwali Lakshmi Puja Muhurat: दीपों के पर्व दिवाली को लेकर घरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस दिन मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि दिवाली की रात मां लक्ष्मी घरों में भ्रमण करती हैं।
3 min read
• •
Updated: 2 Nov 2026, 1:24 PM IST
Diwali Puja Vidhi: AI Creative
Diwali Puja Vidhi: AI Creative

Diwali Shubh Muhurat 2026: पवित्र कार्तिक माह जहां पुण्य स्नान-दान के लिए विशेष माना गया है। मान्यता है कि सुख-समृद्धि की देवी इसी माह धरा पर भ्रमण करने आती हैं। इसी दिन लंका पर विजय प्राप्त कर भगवान श्रीराम अयोध्या लौटे थे। इस स्वागत में हर कोई घर-द्वार चमकाने में जुट गया है। क्योंकि कार्तिक पूर्णिमा या देव दिवाली नजदीक हैं। दीपोत्सव पर्व को लेकर शहर में उत्साह का माहौल है। दिवाली सप्ताह का भी आगाज रवि पुष्य नक्षत्र से होने के साथ ही धनतेरस और दिवाली की खरीदारी का प्लान घर-घर बन रहा है। पंडितों के अनुसार इस बार अमृत के चौघडि़या में महालक्ष्मी पूजन का संयोग बन रहा है।

कार्तिक मास व्रत पूजा का माह होने से करवा चौथ, अहोई अष्टमी, रमा एकादशी, गौवत्स द्वादशी, धनतेरस, रूप चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाईदूज, सौभाग्य पंचमी, छठ पर्व, गोपाष्टमी, आंवला नवमी, देव एकादशी, बैकुंठ चतुर्दशी, कार्तिक पूर्णिमा धूमधाम से मनाया जाता है।

देवउठनी एकादशी पर चार महीने बाद जागेंगे भगवान विष्णु, शुरू होंगे मांगलिक कार्य

संस्कृत भाषा के प्रचारक एवं धर्मशास्त्री पंडित चन्द्रभूषण शुक्ला ने बताया कि इन पर्वों में देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने क्षीरसागर में निद्रा से जाग्रत होते हैं। तभी चातुर्मास का समापन और मांगलिक कार्यों का प्रारंभ होता है।

8 नवंबर को दिवाली और 10 नवंबर को गोवर्धन पूजा, जानें तारीखों का कारण

धर्मशास्त्री पंडित चन्द्रभूषण शुक्ला के अनुसार विशेष शुभ मुहूर्त लक्ष्मी पूजन कर लोग सुख समृद्धि की कामना करेंगे। पौराणिक मान्यता है कि दिवाली के दिन महालक्ष्मी घर-घर भ्रमण करती हैं। इसलिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। इस बार कार्तिक मास की चतुर्दशी युक्त अमावस्या 8 नवंबर को है। इसी दिन महालक्ष्मी पूजन होगा। इसके बिहान सोमवार को भी दोपहर 12 बजे के बाद तक अमावस्या तिथि होने के कारण पिछले साल जैसा ही दिवाली के दूसरे दिन गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को है।

दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश और कुबेर की पूजा कैसे करें? जानें जरूरी विधि

मां महामाया मंदिर रायपुर के पंडित शुक्ला के अनुसार दिवाली पर मुख्य रूप से प्रदोष काल, वृषभ लग्न एवं गोधूली बेला में शाम 5:30 से 8:10 रात्रि तक तथा इसके अलावा शुभ, लाभ एवं अमृत के चौघड़िया में पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है। इस दिन लक्ष्मी-गणेश, कुबेर को पूजन चौक पर सजाकर विराजने का आह्वान करेंगे। अनेक प्रकार के पुष्पों, फलों, मिष्ठान अर्पित कर पूजन संपन्न करना चाहिए। इसी दिन कारोबारी सालभर का बही खाता नया खोलकर पूजन करते हैं।

दिवाली 2026: लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त और अमावस्या तिथि

  • अमावस्या 8 नवंबर सुबह 11:27 बजे प्रारंभ होकर 9 नवंबर दोपहर 12:31 पर समाप्ति होगी। इसलिए प्रदोष काल, गोधूली बेला एवं स्थिर वृषभ लग्न में शाम 5:40 से रात्रि 8.10 तक बहुत ही शुभ है।
  • निशीथ काल (तांत्रिक पूजन ): रात 11:35 से 12:30 तक।

चौघड़िया मुहूर्त दिन का

  • चर - 07:15 से 08:38 - शुभ, यात्रा
  • लाभ - 08:38 से 10:00 - सोना।
  • अमृत - 10:00 से 11:23 - सभी शुभ कार्य - अति शुभ।
  • शुभ - 12:45 से 02:08 - दुकान, ऑफिस की पूजा के लिए उत्तम।

रात का चौघड़िया

  • शुभ - 04:53 से 06:31 - दरवाजे पर बंदनवार, रंगोली, दीये सजाकर पूजा करें यही गोधूली बेला है।
  • अमृत - 06:31 से 08:08 - लक्ष्मी पूजा के लिए सबसे उत्तम। वृषभ लग्न भी है।
  • चर - 08:08 से 09:45 - व्यापारियों के लिए बही-खाता पूजा।
  • लाभ - रात्रि 01:00 से 02:38 - निशीथ काल पूजा, तिजोरी पूजन किया जाता है।

इस साल दिवाली के शुभ संयोग

  1. दुर्लभ रविवार दिवाली: रविवार को अमावस्या, सूर्य का दिन - राजयोग।
  2. सौभाग्य और शोभन योग: इस दिन स्वाति नक्षत्र , आयुष्मान योग रहेगा। सुबह चतुर्दशी का स्नान फिर अमावस्या का संयोग।
  3. वृषभ लग्न, तुला लग्न का लाभ: शाम को वृषभ (धन स्थिर) और रात को तुला लग्न में पूजा शुभ।
Updated on:
2 Nov 2026, 1:24 PM IST
Published on: