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400 परिवारों के हाथों से रोशन होंगे घर, रायपुरा में दीपावली के लिए दीये बनाने का काम तेज, जानें कुम्हारों की कहानी

Raipur Potters: दीपावली पर घरों को रोशन करने के लिए रायपुरा में करीब 400 परिवार मिट्टी के दीये और अन्य सजावटी सामान बनाने में जुटे हैं। पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा को विशाखा चक्रधारी जैसे युवा आगे बढ़ा रहे हैं।
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रायपुर

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Khyati Parihar

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Updated: 23 Oct 2026, 9:37 AM IST

Clay Diya Making

दीपावली के लिए दीये बनाने का काम तेज (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Diwali Diyas: दीपावली की रोशनी बिखेरने के लिए राजधानी के रायपुरा में करीब 400 परिवार मिट्टी के दीये और अन्य सामान तैयार करने में जुटे हैं। किसी के हाथ मिट्टी को आकार दे रहे हैं, तो कोई दीयों को रंगकर उन्हें आकर्षक बना रहा है। इन परिवारों के लिए दीपावली सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि सालभर की मेहनत और पारंपरिक हुनर को बाजार तक पहुंचाने का बड़ा अवसर है। यहां दीयों के साथ मिट्टी के बर्तन और दुर्गा-गणेश की प्रतिमाएं भी बनाई जाती हैं।

10 साल की उम्र से सीखा मिट्टी को गढ़ना

रायपुर के विशाखा चक्रधारी भी इस विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने महज 10 साल की उम्र से हाथों से दीये और मिट्टी के दूसरे सामान बनाना सीखना शुरू कर दिया था। उन्होंने बीएससी फाइनल तक की पढ़ाई पूरी की।

विशाखा प्रतिदिन करीब 2 हजार दीये बनाने का लक्ष्य रखती हैं। दीये बनाने के बाद उन्हें सूखने के लिए रखा जाता है। फिर रंग में डुबोकर आकर्षक बनाया जाता है और दोबारा सुखाया जाता है। इसके बाद लकड़ी और कंडों की मदद से भट्ठे में पकाया जाता है। एक बार में पकाने के लिए करीब 10 हजार दीये इकट्ठा किए जाते हैं, जिन्हें तैयार करने में पांच घंटे से अधिक समय लगता है।

मेहनत ज्यादा, दाम कम मिलने की चिंता

फिलहाल विशाखा 20 रुपए दर्जन के भाव से दीये बेचती हैं। वह अपना स्टॉल लगाकर सीधे ग्राहकों तक भी सामान पहुंचाती हैं। उनका कहना है कि दलाल आधी कीमत पर सामान खरीदना चाहते हैं। इससे कारीगरों को मेहनत के अनुपात में उचित दाम नहीं मिल पाता और मुनाफा भी कम हो जाता है।

सोशल मीडिया से अपने हुनर को दे रहीं पहचान

विशाखा चक्रधारी पारंपरिक कुम्हारी के साथ सोशल मीडिया का भी सहारा ले रही हैं। वह अपने बनाए दीयों और मिट्टी के दूसरे उत्पादों का प्रचार-प्रसार करती हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग उनके काम को जान सकें। सोशल मीडिया के जरिए वह अपने उत्पादों को ग्राहकों तक पहुंचाने और परिवार के पारंपरिक व्यवसाय को नई पहचान दिलाने की कोशिश कर रही हैं।