रायपुर

Guest Editor: महिला सरपंच ने जल प्रबंधन सिखाकर बदल दी गांव की तस्वीर

Guest Editor: सोच- सतत प्रयास से हर मुशिकल काम आसान हो जाता है और उसके परिणाम भी सामने नजर आते हैं।
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Updated: 7 Nov 2026, 1:38 AM IST
Guest Editor

Gues tEditor: छत्तीसगढ़ के वनांचल छुरिया ब्लॉक के गुंडरदेही गांव की महिला सरपंच उमा सिंह ठाकुर ने तीन साल में कंटूर ट्रेंच, गेबियन डैम और इंजेक्शन वेल बनाकर गुंडरदेही की तस्वीर बदल दी। गुंडरदेही गांव कभी भीषण जलसंकट से जूझ रहा था। हालात ऐसे थे कि 600 से 700 फीट तक बोरवेल खोदने पर भी पानी नहीं मिलता था। गर्मियों में पेयजल के लिए ग्रामीणों को परेशान होना पड़ता था। लेकिन आज इसी गांव में 70 से 130 फीट की गहराई पर पानी उपलब्ध है।

तीन साल में भूजल स्तर में आए इस बदलाव के पीछे महिला सरपंच की पहल, ग्रामीणों का श्रमदान और वैज्ञानिक तरीके से किया गया जल प्रबंधन है। गांव ने साबित किया कि बारिश की हर बूंद को सहेजकर जल संकट का स्थायी समाधान किया जा सकता है। तीन साल पहले सरपंच उमा सिंह ठाकुर ने अपने घर में 700 फीट तक बोर कराया, लेकिन पानी की एक बूंद नहीं मिली। इस अनुभव ने उन्हें गांव को जलसंकट से उबारने के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने पंचायत और ग्रामीणों के साथ मिलकर 'मिशन जल रक्षा' शुरू किया। इसके तहत गांव में केवल जल संरचनाएं बनाने पर जोर नहीं दिया गया, बल्कि बारिश के पानी को रोकने, जमीन में उतारने और भूजल स्रोतों को रिचार्ज करने की योजना बनाई गई।

श्रमदान से तैयार हुई जल संरक्षण की संरचनाएं: इस अभियान में ग्रामीणों ने मिलकर जल संरक्षण के कामों में श्रमदान किया। ढलान वाले 13 एकड़ क्षेत्र में कंटूर ट्रेंच खोदे गए, ताकि बारिश का पानी तेजी से बहकर बाहर न जाए और जमीन में समा सके। बरसाती नालों पर पत्थरों और जालियों से गेबियन चेकडैम बनाए गए। इससे पानी का बहाव धीमा हुआ और आसपास की जमीन में जल का रिसाव बढ़ा। डबरियों और परकोलेशन टैंकों में इंजेक्शन वेल तैयार किए गए। इनमें 200 फीट तक केसिंग डालकर बारिश के साफ पानी को जमीन की गहराई तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई। छह बोरवेल में रिचार्ज शाफ्ट भी बनाए गए।

जल के साथ पर्यावरण बचाने पर भी जोर: पंचायत ने जल संरक्षण को हरियाली से जोड़ते हुए 8 एकड़ में 2600 से अधिक मिश्रित फलदार पौधे लगाए। उनकी देखभाल भी सामूहिक जिम्मेदारी बनाई गई। छुरिया जनपद पंचायत के सीईओ होरीलाल साहू और तकनीकी सहायक शुभम के मार्गदर्शन में ग्रामीणों ने अभियान को आगे बढ़ाया। गुंडरदेही की यह पहल बताती है कि पंचायत का मजबूत नेतृत्व, तकनीकी समझ और ग्रामीणों की भागीदारी मिल जाए तो जल संकट से जूझते गांव भी आत्मनिर्भर बन सकते हैं।