
रायपुर@संतराम साहू। Chhattisgarh Flyover News: शहरों में बढ़ते यातायात दबाव और लगातार लगने वाले जाम से राहत दिलाने के लिए फ्लाईओवर और ग्रेड सेपरेटर की घोषणाएं तो हुईं, लेकिन कई परियोजनाएं घोषणा और स्वीकृति के बाद भी जमीन पर आकार नहीं ले सकी हैं। राजधानी रायपुर इसका सबसे बड़ा उदाहरण बनकर सामने आ रहा है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नवंबर 2024 में रायपुर में चार फ्लाईओवर के लिए स्वीकृति की घोषणा की थी। इनमें तेलीबांधा, सरोना, उद्योग भवन और धनेली जंक्शन शामिल हैं। करीब दो साल बाद भी इन परियोजनाओं में से प्रमुख परियोजनाएं निर्माण शुरू होने की स्थिति तक नहीं पहुंच पाई हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा तेलीबांधा चौक के प्रस्तावित करीब 400 करोड़ रुपए के छह लेन फ्लाईओवर की है। यहां मिट्टी परीक्षण और ड्राइंग-डिजाइन का काम पूरा होने के बावजूद टेंडर की मंजूरी का इंतजार बना हुआ है। परियोजना करीब दो साल से स्वीकृति प्रक्रिया में अटकी बताई जा रही है। एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार टेंडर की अनुमति के बाद ही निविदा, निर्माण एजेंसी का चयन और वर्क आर्डर जैसी प्रक्रियाएं आगे बढ़ेंगी।
रायपुर में समस्या सिर्फ तेलीबांधा तक सीमित नहीं है। टाटीबंध से तेलीबांधा और आगे वीआईपी रोड की ओर जाने वाले मार्ग पर सुबह-शाम भारी यातायात दबाव रहता है। सरोना, उद्योग भवन और धनेली जैसे प्रमुख जंक्शनों पर भी ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ रहा है। सरकार की ओर से इन स्थानों पर ग्रेड सेपरेटर और फ्लाईओवर की योजनाओं का उद्देश्य इसी दबाव को कम करना है।
राजधानी के साथ बिलासपुर जैसे बड़े शहरों में भी बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या के कारण प्रमुख चौराहों पर यातायात प्रबंधन बड़ी चुनौती बन रहा है। पेंड्रीडीह इंटरचेंज को एनएचएआई ने बेहतर कनेक्टिविटी के उदाहरण के तौर पर विकसित किया है, लेकिन शहर के भीतर कई प्रमुख मार्गों पर भविष्य की यातायात जरूरतों के हिसाब से फ्लाईओवर और ग्रेड सेपरेटर की मांग बनी हुई है।
दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में खुर्सीपार गेट और सिरसा गेट जैसे व्यस्त जंक्शनों पर फ्लाईओवर की जरूरत लंबे समय से बताई जा रही है। इन स्थानों पर जाम के कारण रायपुर आने-जाने वाले लोगों को पीक आवर्स में परेशानी होती है। ऐसे में रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग-भिलाई जैसे शहरों में केवल घोषणा नहीं, बल्कि समयबद्ध टेंडर और निर्माण शुरू करना जरूरी है।