
Raipur Monsoon: नगर निगम प्रशासन अभी भी ऐसी स्थिति में नहीं है कि बारिश हो तो जलभराव नहीं होगा। क्योंकि बारिश पूर्व की सारी तैयारी पहली बारिश में खोखली निकली हैं। हर वार्ड में जलभराव हुआ, जहां पहले नहीं होता था, वह इलाके भी जलमग्न हो गए। इसकी बड़ी वजह सामने है कि जमीनी स्तर पर ड्रेनेज टू ड्रेनेज की न तो सफाई कराई गई न ही निकासी में बाधक पाटे और कब्जे हटाए गए।
हैरानी ये कि जो काम निगम अमले को मार्च से 15 जून तक करना था, वही काम करने में मानसून आने के बाद अब हर जोन में सक्रियता दिखाई जा रही है। भूमिपूजन में विकास के दावे करने में राजधानी के चारों विधानसभा क्षेत्रों के विधायक भी पीछे नहीं रहे। ऐसे दावों पर भी पानी फिरा। समता कॉलोनी जैसी जगह में खाटू श्याम मंदिर जाने वाली रोड तक नहीं बच पाई। नतीजा, उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम के सभी वार्डों की बस्तियों और कॉलोनियों की बदतर तस्वीरें सामने आईं।
पहली बारिश में जलभराव होने पर जोन 10 के जिम्मेदारों की पोकलेन मशीन निकली। वार्ड 53 क्षेत्र में डुमरतराई श्मशानघाट से कच्चा नाला खोदकर निकासी का काम कराया। जोन कमिश्नर मोनेश्वर शर्मा का दावा है कि अब वहां जलभराव नहीं होगा। जोन 3 कमिश्नर प्रीति ङ्क्षसह की टीम ने मोवा ओवरब्रिज के नीचे होंडा शोरूम एवं अस्पताल प्रबंधन को खुद पाटों को तोडऩे की हिदायत दी है।
पिछले दो महीने से महापौर मीनल चौबे, निगम आयुक्त संबित मिश्रा लगातार जलभराव, सफाई को लेकर चेतावनी देते रहे। लेकिन जोनों के अमले पर कोई फर्क नहीं पड़ा। विशेष सामान्य सभा में घेराबंदी और मुखर स्वर उठने के बाद अब हर जोन का अमला और मशीनें निकले हैं। पानी निकासी में बाधक नाले-नालियों और बाजारों और कॉलोनियों के पाटे भी तोड़े जा रहे हैं। जोन 3 ने पानी भरने पर वीरांगना अवन्ति बाई लोधी चौक के पास 5 पाटों को तोड़ा गया।
राजधानी में जलभराव सबसे गंभीर विषय है। हिदायत और चेतावनी देने मात्र से समाधान नहीं हो सकता है। क्योंकि जब तक जमीनी स्तर पर ड्रेनेज टू ड्रेनेज सफाई नहीं होगी, निकासी में बाधक कब्जों को सख्ती से हटाया नहीं जाता, तब तक रिजल्ट नहीं दिखेगा। मेरा मानना है कि बारिश के चार माह पहले वार्ड स्तर पर पानी निकासी की बाधाओं को दूर करने पर काम किया जाना चाहिए था। ऐसे कामों में राजनीतिक दखल भी बड़ी समस्या है। दूसरी बात, हर वार्ड को तीन से चार भागों में बांटकर जब पूरा अमला जुटता है, तो वह काम दिखता है। वर्तमान निगम आयुक्त ने हर वार्ड में उपअभियंता को नियुक्त किया है। इसकी हर रोज समीक्षा और उस पर काम होना चाहिए।