रायपुर

World Iodine Deficiency Day: नमक में आयोडीन है भी या नहीं? छत्तीसगढ़ में 11 साल से नहीं हुआ सर्वे, सेहत पर खतरा

Iodine Deficiency in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में नमक में आयोडीन की मात्रा की जांच और निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रदेश में 2015 के बाद जिला-स्तरीय सर्वे नहीं हुआ है।
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Oct 21, 2026
World Iodine Deficiency Day
गर्भ में बच्चे के बौद्धिक विकास पर पड़ सकता है असर (फोटो सोर्स- AI)

रायपुर@पीलूराम साहू। World Iodine Deficiency Day: प्रदेश में बिक रहे नमक में आयोडीन है कि इसकी जांच नहीं हो रही है। जबकि आयोडीन की कमी से गर्भवती महिलाएं कम आईक्यू वाले बच्चों को जन्म दे सकती है। इसका असर ब्रेन व बौद्धिक विकास पर पड़ता है। गौर करने वाली बात ये है कि प्रदेश में आयोडीन डिफिसिएंसी डिसआर्डर (आईडीडी) सेल का गठन अब तक नहीं हुआ है। इसके कारण प्रदेश में बिकने वाले नमक में आयोडीन की मात्रा की मॉनिटरिंग ही नहीं हो रही है। 21 अक्टूबर को विश्व आयोडीन कमी दिवस है, लेकिन प्रदेश में आयोडीन की स्थिति जांचने के लिए सरकारी सिस्टम ही नहीं है।

केंद्र सरकार के नेशनल आयोडीन डेफिशियेंसी डिसऑर्डर कंट्रोल प्रोग्राम (एनआईडीडीसीपी) के तहत राज्य में आईडीडी सेल और आईडीडी मॉनिटरिंग लैब ही नहीं बनी है। इस वजह से आखिरी जिला-स्तरीय सर्वे 2015 में हुआ था। उसके बाद रायपुर समेत किसी भी जिले में आधिकारिक सर्वे नहीं हुआ। पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के पीएसएम विभाग ने 2011 में रायपुर जिले में गर्भवती महिलाओं पर स्टडी की थी।

घरों में नमक में कम मिला था आयोडीन

2011 के सर्व में 41 फीसदी घरों के नमक में आयोडीन 15 पीपीएम से कम मिला था और 51 फीसदी महिलाओं में आयोडीन की कमी पाई गई। स्टडी की रिपोर्ट में ही लिखा गया था कि छत्तीसगढ़ में प्रोग्राम की मॉनिटरिंग कमजोर है, हर जिले में आईडीडी सेल व लैब बनने चाहिए। 2015 में महासमुंद, राजनांदगांव, कांकेर व कोरिया में हुए सर्वे में सबसे ज्यादा 17.56 फीसदी घेंघा के मरीज राजनांदगांव में मिला था। जबकि विश्व स्वास्थ्य संगठन का मानक 5 फीसदी से कम होना चाहिए।

रूक जाता है गर्भ में भ्रूण का बौद्धिक विकास

गर्भावस्था के दौरान आयोडीन की कमी का सीधा असर अजन्मे बच्चे के मस्तिष्क व बौद्धिक विकास पर पड़ता है। गर्भावस्था में भ्रूण के मस्तिष्क (ब्रेन) और तंत्रिका तंत्र के विकास के लिए थायरॉइड हॉर्मोन बहुत जरूरी होता है, जिसका निर्माण मां के शरीर में मौजूद आयोडीन से होता है। एक रिसर्च के अनुसार गर्भावस्था में आयोडिन की कमी होने से बच्चे के आईक्यू स्तर, पठन कौशल व भाषा विकास में गिरावट आ सकती है।

महासमुंद की रिपोर्ट इस तरह

  • सैंपल- 2700 बच्चे (6-12 साल), 30 क्लस्टर
  • कुल घेंघा- 4.29%
  • लड़कों में 4.1%, लड़कियों में 4.5%
  • ग्रेड एक (हाथ से छूने पर पता चले)- 3.8%
  • ग्रेड दो (दिखाई दे)- 0.49%
  • पेशाब में आयोडीन-37.4% बच्चों में 100 से कम
  • नमक में आयोडीन- 20% घरों में नमक में 15ppm से कम
  • दुकानों पर 22% सैंपल में कम।
  • टिप्पणी थी कि घेंघा तो कंट्रोल में है, पर यूनिवर्सल साल्ट आयोडाइजेशन (यूएसआई) का टारगेट 90 फीसदी घरों तक पहुंचना चाहिए, महासमुंद में सिर्फ 80 फीसदी था।

राजनांदगांव की रिपोर्ट इस तरह

  • सैंपल- 2700 बच्चे (6-12 साल), 30 क्लस्टर
  • कुल घेंघा-17.56%, पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा
  • लड़के 17.2%, लड़कियां 17.9%
  • पेशाब में आयोडीन मीडियन 44.80 एमसीजीएल (बहुत कम)
  • 87% बच्चों में आयोडीन की कमी
  • नमक- 48% घरों में 15 पीपीएम से कम

कांकेर की रिपोर्ट

  • घेंघा- 8.37%
  • मीडियन आयोडिन- 76.32 एमसीजीएल
  • 62% बच्चों में कमी

कोरिया जिले की रिपोर्ट

  • घेंघा- 3.37% (सबसे कम)
  • मीडियन 103.57 एमसीजीएल
  • 32% बच्चों में कमी

टॉपिक एक्सपर्ट

डॉ. सारिका साहू, सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट के मुताबिक, गर्भ में या बचपन में आयोडीन की कमी होने से बच्चे की बुद्धि का स्तर (आईक्यू) 6 से 13.5 अंक तक कम हो सकता है। यही नहीं नवजात शिशुओं में मानसिक विकलांगता, गूंगापन, बहरापन व गंभीर शारीरिक विकास में रुकावट (क्रेइटिनिज़्म) हो सकती है। मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस (याददाश्त और सीखने वाले हिस्से) के विकास पर बुरा असर पड़ता है। वयस्कों में इसकी कमी से याददाश्त कमजोर होना, ब्रेन फॉग, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, सुस्ती व मानसिक थकान जैसी समस्याएं होती हैं।

Updated on:
21 Oct 2026 08:22 am
Published on:
21 Oct 2026 08:22 am