रायपुर

कुर्रा की कोटवारी जमीन का पुराना रिकॉर्ड खोलेगा राज? बिक्री से नामांतरण तक की प्रक्रिया पर उठे सवाल

Chhattisgarh Revenue Records: छत्तीसगढ़ के कुर्रा में 0.53 हेक्टेयर कोटवारी जमीन की बिक्री, रजिस्ट्री और नामांतरण पर सवाल उठे हैं। खसरा नंबर 941 से जुड़े मामले में 2010 के राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच अहम मानी जा रही है।
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Oct 10, 2026
Land Registry Dispute
रायपुर कोटवारी जमीन का मामला गरमाया! (Photo Source- Patrika)

विनोद जैन/Land Registry Dispute: गोबरा नवापारा के ग्राम कुर्रा की 0.53 हेक्टेयर जमीन की बिक्री को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मामला खसरा नंबर 941 (पुराना खसरा नंबर 641) से जुड़ा है। सवाल यह है कि यदि संबंधित जमीन कोटवारी सेवा भूमि थी और उसके हस्तांतरण पर प्रतिबंध लागू था, तो उसकी रजिस्ट्री किस आधार पर हुई और नामांतरण की प्रक्रिया कैसे पूरी की गई? इन सवालों के जवाब के लिए वर्ष 2010 के राजस्व रिकॉर्ड की जांच अहम मानी जा रही है।

मामले में जमीन की वास्तविक राजस्व स्थिति, बिक्री के समय लागू नियमों और नामांतरण दर्ज करने वाले आदेश की पड़ताल जरूरी है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर फिलहाल किसी अधिकारी या व्यक्ति की जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकती। इसके लिए मूल दस्तावेजों और संबंधित आदेशों की जांच आवश्यक है।

Kotwari Service Land: 2010 के राजस्व रिकॉर्ड से मिल सकते हैं अहम जवाब

इस मामले में तत्कालीन खसरा-पंचशाला, नामांतरण प्रकरण, जांच प्रतिवेदन और आदेश-पत्र महत्वपूर्ण दस्तावेज माने जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2010 के दौरान पटवारी कन्हैया ध्रुव और आरआई डी.आर. साहू की पदस्थापना बताई गई है। ऐसे में उस समय के राजस्व अभिलेखों की जांच से यह स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है कि जमीन की स्थिति क्या दर्ज थी और उसके हस्तांतरण के लिए किन नियमों का पालन किया गया।

हालांकि, किसी अधिकारी की पदस्थापना मात्र से उसकी भूमिका या किसी अनियमितता में संलिप्तता साबित नहीं होती। जिम्मेदारी तय करने के लिए यह देखना होगा कि संबंधित अवधि में किस अधिकारी ने कौन-सी कार्रवाई की, किस आधार पर रिपोर्ट तैयार हुई और नामांतरण का आदेश किसने जारी किया।

रजिस्ट्री से पहले किन दस्तावेजों की हुई जांच?

मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू जमीन की रजिस्ट्री है। यदि संबंधित भूमि कोटवारी सेवा भूमि की श्रेणी में दर्ज थी, तो उसके हस्तांतरण पर लागू नियमों और आवश्यक अनुमतियों की स्थिति की जांच करनी होगी। इसके लिए रजिस्ट्री के समय प्रस्तुत दस्तावेजों, जमीन के स्वामित्व और राजस्व स्थिति से जुड़े रिकॉर्ड तथा किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति के दस्तावेजों का मिलान जरूरी है।

इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जमीन की बिक्री निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुई थी या नहीं। इसी तरह नामांतरण की कार्रवाई भी जांच के दायरे में है। नामांतरण किस आवेदन पर दर्ज हुआ, राजस्व अधिकारियों के सामने कौन-से दस्तावेज पेश किए गए और आदेश किस आधार पर पारित किया गया, इन सभी बिंदुओं की पड़ताल जरूरी है।

राजस्व विभाग ने पुलिस से की थी कार्रवाई की मांग

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राजस्व विभाग ने 18 सितंबर 2026 को गोबरा नवापारा पुलिस को पत्र भेजकर जमीन के कथित अनियमित हस्तांतरण के मामले में कानूनी कार्रवाई का अनुरोध किया था। इसके बाद पुलिस ने 4 अक्टूबर 2026 को संबंधित राजस्व अधिकारी से स्पष्ट प्रतिवेदन और जरूरी दस्तावेज मांगे जाने की बात कही। पुलिस की ओर से यह पक्ष सामने आया कि आवेदन में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए पर्याप्त विवरण उपलब्ध नहीं थे।

इस घटनाक्रम में दोनों विभागों के बीच पत्राचार और प्रस्तुत दस्तावेज अहम हैं। राजस्व विभाग ने किस आधार पर कार्रवाई की मांग की और पुलिस ने किन जानकारियों को अधूरा माना, यह संबंधित पत्रों की प्रमाणित प्रतियां सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

विक्रेता के शपथपत्र को लेकर भी उठे सवाल

जमीन के विक्रेता नोखेलाल नगरची के कथित शपथपत्र और जमीन बेचने के कारणों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। जानकारी में पारिवारिक विवाह और इलाज के खर्च के लिए जमीन बेचने का हवाला दिए जाने की बात सामने आई है। साथ ही, कथित नोटरीकृत शपथपत्र के तहसील रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं होने का दावा भी किया गया है।

इन तथ्यों की पुष्टि के लिए मूल शपथपत्र, नोटरी से संबंधित विवरण और तहसील कार्यालय के रिकॉर्ड का मिलान जरूरी है। केवल शपथपत्र के उपलब्ध नहीं होने की बात से उसके अस्तित्व या वैधता पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। दस्तावेजों की प्रमाणित जांच के बाद ही स्थिति साफ होगी।

Revenue Department Investigation: तीन अहम सवालों के जवाब तलाशना जरूरी

कुर्रा की 0.53 हेक्टेयर जमीन के मामले में मुख्य रूप से तीन सवालों के जवाब तलाशने होंगे। पहला, जमीन की राजस्व अभिलेखों में वास्तविक स्थिति क्या थी और उसके हस्तांतरण पर कौन-से नियम लागू थे? दूसरा, रजिस्ट्री के समय किन दस्तावेजों और अनुमतियों के आधार पर बिक्री की गई? तीसरा, नामांतरण किस आदेश के तहत दर्ज हुआ और उस प्रक्रिया में किन अधिकारियों की क्या भूमिका रही?

इन सवालों का जवाब पुराने राजस्व रिकॉर्ड, रजिस्ट्री दस्तावेजों, नामांतरण प्रकरण और संबंधित विभागों के पत्राचार से मिल सकता है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका के आधार पर जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल, मामले में निर्णायक निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए मूल अभिलेखों की जांच सबसे जरूरी है।

Updated on:
10 Oct 2026 05:43 pm
Published on:
10 Oct 2026 05:43 pm