
रायपुर@हिमांशु शर्मा। Railway News: लगातार ट्रेनों में आईसीएफ (इंटीग्रल कोच फैक्ट्री) कोच को एलएचबी (लिंक हॉफमैन बुश) कोच में बदला जा रहा है, लेकिन कुछ समय से इसमें ब्रेक लग गया है। इसके कारण यात्रियों को अधिक सीटें नहीं मिल पा रही हैं। दरअसल, रेलवे में सफर को अधिक सुरक्षित और आरामदायक बनाने के लिए शुरू किया गया एलएचबी कोच में परिवर्तन का कार्य लंबे समय से अटका हुआ है।
जोन में अब भी सैकड़ों ट्रेनें पुराने आईसीएफ कोच के साथ ही चल रही हैं, जबकि एलएचबी कोच लगने से न सिर्फ सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि यात्रियों को अधिक सीटें और बेहतर सुविधाएं भी मिलेंगी। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, एलएचबी कोच में अधिक सीटें, बेहतर सुविधाएं, कम झटके लगना और 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार को सहन करने जैसी खासियतें हैं।
सामान्य आईसीएफ स्लीपर कोच में 72 बर्थ की तुलना में एलएचबी स्लीपर कोच में 80 बर्थ उपलब्ध होती हैं। इसी प्रकार, आईसीएफ एसी-3 कोच में 64 बर्थ की तुलना में एलएचबी एसी-3 कोच में 72 बर्थ और आईसीएफ एसी-2 कोच में 46 बर्थ की तुलना में एलएचबी एसी-2 कोच में 62 बर्थ उपलब्ध होती हैं। वर्तमान में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे से चलने वाली 26 ट्रेनों के 34 रैक में एलएचबी कोच उपलब्ध हैं।
जोन की बिलासपुर-भगत की कोठी, बिलासपुर-बीकानेर, बिलासपुर-बक्सर, बिलासपुर-एर्नाकुलम, बिलासपुर-चेन्नई, बिलासपुर-पुणे, रायपुर-कोरबा, बिलासपुर-अमृतसर छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, दुर्ग-निजामुद्दीन संपर्क क्रांति, दुर्ग-जम्मूतवी, दुर्ग-नौतनवा, दुर्ग-कानपुर, दुर्ग-अजमेर, दुर्ग-ऊधमपुर, दुर्ग-निजामुद्दीन हमसफर, दुर्ग-भोपाल अमरकंटक एक्सप्रेस, रायगढ़-गोंदिया जनशताब्दी, कोरबा-इतवारी शिवनाथ एक्सप्रेस, बिलासपुर-नागपुर इंटरसिटी, बिलासपुर-रीवा, बिलासपुर-इंदौर नर्मदा एक्सप्रेस, बिलासपुर-येलहंका, दुर्ग-अंबिकापुर व अंबिकापुर-शहडोल ट्रेनों में एलएचबी कोच की सुविधा उपलब्ध है।
एलएचबी कोच का नाम जर्मनी की कंपनी लिंक हॉफमैन बुश के नाम पर पड़ा है। भारतीय रेलवे में इन कोचों को वर्ष 1999 में शामिल किया गया था। वर्तमान में इनका निर्माण कपूरथला स्थित रेलवे कोच फैक्ट्री में किया जाता है। आधुनिक डिजाइन, मजबूत संरचना, बेहतर सस्पेंशन प्रणाली, अधिक यात्री क्षमता और सुरक्षित एवं आरामदायक यात्रा की विशेषताओं के कारण भारतीय रेलवे में एलएचबी कोचों का उपयोग लगातार बढ़ाया जा रहा है।