
Jungle Closed: छत्तीसगढ़ के टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और अभ्यारण 15 जून से 1 अक्टूबर तक 3 महीने के लिए पर्यटकों के लिए बंद हो जाएगें। उक्त अवधि में जंगल के भीतर को प्रवेश करने की अनुमति नहीं मिलेगी। 2 अक्टूबर को वन्यजीव संरक्षण सप्ताह के शुरू होने के साथ ही फिर से जंगल के दरवाजे खोल दिए जाएगें। रेनी सीजन के दौरान वन्य प्राणियों के प्रजननकाल और बारिश के दौरान जंगल की विपरीत स्थिति को देखते हुए हर साल बंद कर दिया जाता है। पीसीसीएफ एवं वन बल प्रमुख अरुण पांडेय ने बताया, हर साल मानसून के पहले टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य को बंद कर दिया जाता है।
पीसीसीएफ एवं वन बल प्रमुख अरुण पांडेय ने जानकारी देते हुए बताया कि मानसून के समय जंगलों की स्थिति अत्यधिक संवेदनशील हो जाती है। भारी बारिश के कारण कच्चे रास्ते, नदी-नाले और वन मार्ग खतरनाक हो जाते हैं, जिससे पर्यटकों की सुरक्षा को भी खतरा रहता है। इसी कारण हर वर्ष टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और अभ्यारणों को अस्थायी रूप से बंद किया जाता है। उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था केवल पर्यटन रोकने के लिए नहीं बल्कि वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से भी बेहद जरूरी है। इस दौरान जंगलों में जानवरों को शांत वातावरण मिलता है, जिससे उनका प्रजनन काल प्रभावित नहीं होता।
वन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि 1 अक्टूबर तक बंद रहने के बाद 2 अक्टूबर से वन्यजीव संरक्षण सप्ताह की शुरुआत के साथ ही सभी राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए फिर से खोल दिए जाएंगे। इसके बाद पर्यटक एक बार फिर जंगल सफारी और वन्यजीव दर्शन का आनंद ले सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान जंगलों को बंद रखना न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि यह पारिस्थितिकी तंत्र को भी संतुलित बनाए रखने में मदद करता है। बारिश के मौसम में जंगलों में फिसलन, बाढ़ और भूस्खलन जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं, जो पर्यटकों के लिए जोखिम भरी हो सकती हैं।
हालांकि इस फैसले से राज्य के पर्यटन उद्योग पर कुछ समय के लिए असर पड़ता है, लेकिन वन विभाग का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता है। हर साल हजारों पर्यटक छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व और राष्ट्रीय उद्यानों का भ्रमण करते हैं, लेकिन मानसून ब्रेक इस अनुभव को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए जरूरी माना जाता है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और सतत पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।