रायपुर

Patrika Investigation: कवर्धा से दंतेवाड़ा तक फैकल्टी संकट, नए मेडिकल कॉलेजों में MBBS छात्रों के लिए कोई प्रोफेसर ही नहीं

Medical college faculty shortage: छत्तीसगढ़ के 5 नए मेडिकल कॉलेजों में MBBS फर्स्ट ईयर की पढ़ाई शुरू होने से पहले फैकल्टी संकट सामने आया है। 8 सितंबर से नया सत्र शुरू होगा, लेकिन कई कॉलेजों में प्रोफेसर पद खाली हैं।
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Aug 26, 2026
Medical College
8 सितंबर से शुरू होगा मेडिकल कॉलेजों का नया सत्र (photo source- AI)

@पीलू साहू/Medical College: मेडिकल कॉलेजों में नए सत्र की पढ़ाई 8 सितंबर से शुरू हो जाएगी, लेकिन प्रदेश के 5 नए मेडिकल कॉलेजों कवर्धा, जांजगीर-चांपा, मनेंद्रगढ़, कुनकुरी व दंतेवाड़ा में फर्स्ट ईयर वालों को पढ़ाने के लिए प्रोफेसर ही नहीं हैं। हां, कुछ कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर जरूर हैं। जहां, असिस्टेंट प्रोफेसर भी नहीं है, वहां क्लास कैसे लगेगी, ये सोचने वाली बात है। हालांकि चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों का दावा है कि क्लास शुरू होने से पहले फैकल्टी की नियुक्ति कर दी जाएगी।

New medical colleges chhattisgarh: स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर कर रहे इलाज

एमबीबीएस के फर्स्ट ईयर में एनाटॉमी, फिजियोलॉजी व बायो केमेस्ट्री की पढ़ाई होती है। एनएमसी के नार्म्स के अनुसार इन विभागों में कम से कम एक प्रोफेसर होना चाहिए, लेकिन सभी नए कॉलेजों में नहीं है। पत्रिका की पड़ताल में पता चला है कि जांजगीर-चांपा में तीनों विषयों के असिस्टेंट प्रोफेसर तो है, लेकिन प्रोफेसर अभी नहीं है।

यही नहीं जिला अस्पताल को मेडिकल कॉलेज अस्पताल तो बना दिया गया है, लेकिन कॉलेज के डॉक्टरों की ड्यूटी अस्पताल में नहीं लगाने की बात सामने आ रही है। वहां 200 से 250 मरीज भर्ती रहते हैं, लेकिन अभी भी स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। दंतेवाड़ा में बायो केमेस्ट्री के लिए अभी फैकल्टी नहीं होने की बात सामने आई है।

55 डॉक्टरों का प्रमोशन नए कॉलेजों में नहीं भेजे

राज्य शासन ने मंगलवार को 55 असिस्टेंट प्रोफेसरों को प्रमोट कर एसोसिएट प्रोफेसर बनाया है। गौर करने वाली बात ये है कि इनमें किसी भी डॉक्टर को नए कॉलेजों में नहीं भेजा गया है। हो सकता है कि राज्य शासन की मंशा हो कि पीजी सीटों की मान्यता बनी रहे। हालांकि महासमुंद, कांकेर में पीजी की एक भी सीट नहीं है। ऐसे में प्रमोशन सूची पर कई जानकार सवाल भी उठा रहे हैं। दरअसल डेढ़ माह पहले शासन ने एसोसिएट प्रोफेसरों को प्रमोट कर प्रोफेसर बनाया था। इनमें रायपुर यानी नेहरू मेडिकल कॉलेज से 18 डॉक्टरों को बाहर भेज दिया था। इनमें दो डॉक्टरों का तबादला रुक गया है। ये फोरेंसिक मेडिसिन व कैंसर विभाग के डॉक्टर हैं।

महासमुंद, कांकेर व दुर्ग जैसे कॉलेजों में भी फैकल्टी नहीं

पुराने मेडिकल कॉलेजों में दुर्ग, महासमुंद व कांकेर की बहुत बुरी स्थिति है। दुर्ग स्थित चंदूलाल चंद्राकर सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की 200 सीटें हैं, लेकिन जानकारों के अनुसार वहां 50 सीटों के लायक भी फैकल्टी नहीं है। यही स्थिति महासमुंद, कांकेर व दूसरे मेडिकल कॉलेजों की हैं। इन कॉलेजों में 125 सीटें हैं। कांकेर कॉलेज में तो एमडी एनाटॉमी के बजाय एमएससी डिग्रीधारी है, जो कॉलेज शुरू होने के समय से ही है। पैथोलॉजी का कोई प्रोफेसर भी नहीं था। इसके बाद भी वहां का रिजल्ट 98 से 99 फीसदी आया।

डॉ. यूएस पैकरा, डीएमई ने बताया कि नए सत्र चालू होने के पहले सभी कॉलेजों में फैकल्टी की कमी दूर हो जाएगी। फर्स्ट ईयर के लिए जरूरी फैकल्टी की व्यवस्था की गई है।

Updated on:
26 Aug 2026 07:47 am
Published on:
26 Aug 2026 07:46 am