रायपुर

New Bastar: नक्सलवाद का खात्मा, अब विकास के साथ गढ़ा जा रहा नया बस्तर

बस्तर की नई करवट: जनजातीय गौरव के साथ विकास की ओर बढ़ते कदम, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का आगमन सांस्कृतिक विरासत को देगा राष्ट्रीय सम्मान
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Updated: 22 Oct 2026, 11:12 PM IST
New Bastar

New Bastar: नक्सलवाद के खात्मे के बाद छत्तीसगढ़ में नया बस्तर आकार रहा है। बस्तर अब शांति, सांस्कृतिक गौरव और विकास की नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में स्थानीय आजीविका, युवा प्रतिभाओं और जनजातीय विरासत को प्रोत्साहित करने वाली पहलें बदलाव को गति दे रही हैं। इसी पृष्ठभूमि में ऐतिहासिक बस्तर दशहरा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का आगमन क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और विकास की आकांक्षाओं को राष्ट्रीय स्वर देने वाला अवसर है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के विशेष अतिथि बने थे बस्तर के मांझी-चालकी। मौका था विगत जुलाई माह में राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली में बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं और जनजातीय प्रतिनिधियों के विशेष सम्मान का।

सुरक्षा के साथ सुविधाओं और विश्वास का विस्तार: छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सलवाद के विरुद्ध अभियान में मिली सफलता ने विकास के अनुकूल माहौल बनाया है। नक्सलवाद का खात्मा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों की देन है। ‘नियदनेल्लानार’ योजना के तहत सुरक्षा कैंपों के आसपास के गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। वीर गुंडाधूर सेवा डेरा जैसी पहल के जरिए जनसेवा और आजीविका को भी जोड़ा जा रहा है। राज्य सरकार सुरक्षा के साथ नागरिक सुविधाओं की पहुंच बढ़ाकर इस बदलाव को लोगों के दैनिक जीवन से जोड़ रही है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर स्वागत करते छत्तीसगढ़ के सीएम विष्णुदेव साय। साथ में हैं राज्यपाल रमेन डेका।

स्थानीय संसाधनों से आजीविका को मजबूती: साय सरकार बस्तर की आर्थिक संभावनाओं को स्थानीय संसाधनों और समुदायों की भागीदारी के साथ आगे बढ़ा रही है। कृषि, लघु वनोपज, हस्तशिल्प और पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। लघु वनोपज के संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन के माध्यम से वनांचल के परिवारों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। तेंदूपत्ता संग्रहण पारिश्रमिक में वृद्धि से वनोपज पर निर्भर परिवारों को आर्थिक संबल मिला है। स्वयं सहायता समूहों को स्थानीय उत्पादों के निर्माण, मूल्य संवर्धन और बिक्री से जोड़कर महिलाओं की आर्थिक भागीदारी मजबूत की जा रही है। ‘बस्तर इन्वेस्टर कनेक्ट’ जैसे आयोजनों के माध्यम से क्षेत्र में निवेश, उद्यमिता और रोजगार की संभावनाओं को विस्तार दिया जा रहा है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और संपर्क से खुल रहे अवसर: अब बस्तर में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत करने के साथ सड़क तथा संचार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इन प्रयासों से गांवों को प्रमुख सेवा केंद्रों और बाजारों से जोड़ने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ग्रामीण बस परिवहन सेवा के माध्यम से दूरस्थ बसाहटों में आवागमन की सुविधा बढ़ाई जा रही है। इससे विद्यार्थियों, मरीजों, किसानों और छोटे कारोबारियों के लिए प्रमुख केंद्रों तक पहुंच आसान हो रही है।

बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक: सांस्कृतिक मोर्चे पर ‘बस्तरपंडुम’ के जरिये लोक कलाकारों, नर्तकों, शिल्पकारों और पारंपरिक ज्ञान के संवाहकों को मंच दिया जा रहा है। सरकार के अनुसार यह आयोजन नई पीढ़ी को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ बस्तर की विशिष्ट पहचान को व्यापक स्तर पर सामने ला रहा है। वहीं ‘बस्तरओलंपिक’ दूरस्थ गांवों की खेल प्रतिभाओं को पहचान और मंच दे रहा है। आयोजकों का कहना है कि इससे युवाओं की ऊर्जा को रचनात्मक दिशा मिल रही है और उनमें आत्मविश्वास बढ़ रहा है।

राष्ट्रीय पहचान का अवसर: राष्ट्रपति की उपस्थिति को बस्तर के कलाकारों, युवाओं, महिलाओं और स्थानीय समुदायों की आकांक्षाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाले अवसर के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का कहना है कि सुरक्षा, विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रयास साथ-साथ आगे बढ़ रहे हैं। गांवों तक पहुंचती सुविधाएं, प्रतिभाओं को मिलते मंच और आजीविका के बढ़ते अवसर बस्तर के बदलाव को आकार दे रहे हैं।