रायपुर

Mahasmund News: ऑनलाइन फूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर कसेगा शिकंजा, अब नियमों के रडार पर कंपनियां

ऑनलाइन फूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अब नियामकीय निगरानी के दायरे में आ सकते हैं। कंपनियों के कामकाज, उपभोक्ता हितों और नियमों के पालन को लेकर सख्ती की तैयारी है।
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Oct 14, 2026
Mahasmund News
ऑनलाइन फूड डिलीवरी [पर खाद्य विभाग की नजर (photo Patrika)

Mahasmund Online Food Delivery: मोबाइल पर कुछ क्लिक करते ही घर पहुंचने वाला खाना कितना सुरक्षित है और ऑनलाइन मंगाए गए खाद्य पदार्थ की पैकिंग पर लिखे दावे कितने सही हैं? त्योहारों के इस मौसम में ये सवाल इसलिए अहम हैं, क्योंकि घरों तक खाद्य सामग्री पहुंचाने वाली ऑनलाइन व्यवस्था में उपभोक्ता सामान की गुणवत्ता और भंडारण की स्थिति को खुद जांच नहीं पाते। इसी को ध्यान में रखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और उनके गोदामों की जांच की तैयारी की है। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, पैकेट पर दी गई जानकारी और नियमों के पालन की पड़ताल के लिए सघन अभियान चलाया जाएगा। बासी भोजन, पैकेट में कीड़े और गलत ऑर्डर जैसी शिकायतें जांच का आधार बनेंगी।

विभाग की नजर केवल तैयार भोजन की डिलीवरी तक सीमित नहीं

विभाग की नजर केवल तैयार भोजन की डिलीवरी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि लेबलिंग की भी जांच होगी। कई प्रोडक्ट शुद्ध, नेचुरल, हेल्दी होने के दावे करते हैं, उसकी पड़ताल की जाएगी। उत्पाद पर निर्माण या पैकिंग की तारीख, उपयोग की अंतिम तिथि और खाद्य सुरक्षा लाइसेंस संबंधी जानकारी दर्ज है या नहीं, यह देखा जाएगा। गोदामों में खाद्य सामग्री रखने की व्यवस्था और उसकी गुणवत्ता बनाए रखने के इंतजाम भी जांच के दायरे में रहेंगे। दीपावली तक मिठाइयों, नमकीन, पैक्ड खाद्य पदार्थों और तैयार भोजन की मांग बढ़ जाती है।

खरीदारी का दायरा भी बढ़ा

ऑनलाइन ऑर्डर की सुविधा के कारण खरीदारी का दायरा भी बढ़ा है। ऐसे में खाद्य सामग्री को कहां और किस स्थिति में रखा गया है, उसकी गुणवत्ता कितनी सुरक्षित है तथा ग्राहक तक पहुंचने से पहले पैकिंग और परिवहन में जरूरी सावधानियां बरती गई हैं या नहीं, जांच की जाएगी। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग के अधिकारी उमेश कुमार ने बताया कि ऑनलाइन माध्यम से बेचे जाने वाले खाद्य पदार्थों पर भी सख्ती बरतने की तैयारी है। अगोदामों की सघन जांच की जाएगी।

नियमों का पालन जरूरी

खाद्य सामग्री को सुरक्षित रखने, ढोने और डिलीवरी के दौरान स्वच्छता के नियमों का पालन जरूरी है। एफएसएसएआई की 3 दिसंबर 2024 की एडवाइजरी में ऑनलाइन खाद्य कारोबारियों के लिए डिलीवरी के समय उत्पाद की शेष शेल्फ लाइफ कम से कम 30 प्रतिशत या एक्सपायरी से 45 दिन, इनमें से जो भी कम हो, रखने का प्रावधान बताया गया है।

सावधानी जरूरी

बच्चों को आकर्षित करने वाली गैर-खाद्य वस्तुएं रखने पर भी सावधानी जरूरी है। खिलौने, छोटे प्लास्टिक के पात्र या सिक्के जैसी वस्तुएं यदि खाद्य सामग्री के साथ इस तरह रखी जाएं कि बच्चा उन्हें खाने योग्य समझ ले, तोखतरा हो सकता है। बच्चों में ऐसी वस्तुओं के निगलने या गले में फंसने की आशंका रहती है। पैकेट खोलते समय सतर्क रहना चाहिए।

पैकेट पर लिखे दावों की भी होगी जांच

खाद्य पदार्थों को ‘शत-प्रतिशत शुद्ध’, ‘प्राकृतिक’, ‘ताजा’ और ‘स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद’ बताकर बेचा जाता है। कई उत्पादों पर ‘हार्ट के लिए हेल्दी’ और ‘मल्टीग्रेन’ जैसे दावे भी किए जाते हैं। ऐसे दावों के जरिए ग्राहक को उत्पाद की गुणवत्ता और पोषण संबंधी विशेषताओं का भरोसा दिलाया जाता है। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के विज्ञापन एवं दावों से जुड़े नियमों के अनुसार, खाद्य पदार्थों के संबंध में किए जाने वाले दावे सत्य, स्पष्ट और गैर-भ्रामक होने चाहिए। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दी गई जानकारी भी उत्पाद के वास्तविक लेबल से मेल खानी चाहिए। ऐसी समस्या होनेपर राष्ट्रीय टोल फ्री नंबर 1800112100 या ऑनलाइन शिकायत पोर्टल एफएसएसएआई, उपभोक्ता हेल्पलाइन पर कर सकते हैं।

पांच बातों को ना करें नजरअंदाज

पैकेट पर एफएसएसएआई का लोगो और लाइसेंस नंबर जांचें। लाइसेंस नंबर सामान्यत: 14 अंकों का होता है। ‘बेस्ट बिफोर’ उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने की अवधि बताता है, जबकि ‘एक्सपायरी’ या ‘यूज-बाय’ का अर्थ अंतिम तिथि से होता है। इन्हें एक जैसा न समझें। पैकेट खुला हो, सील टूटी हो या सामग्री से असामान्य गंध आए, तो उसका सेवन न करें। खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत करें। ‘प्राकृतिक’, ‘शुद्ध’ या ‘हेल्दी’ जैसे शब्द देखकर ही उत्पाद को सुरक्षित न मानें।

Updated on:
14 Oct 2026 02:54 pm
Published on:
14 Oct 2026 02:54 pm