BJP Congress controversy: पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के रिश्तेदार के ठिकानों पर कार्रवाई के बाद दीपक बैज ने इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया।
Chhattisgarh ED Raid: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित भारतमाला परियोजना मुआवजा घोटाले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सोमवार तड़के बड़ी कार्रवाई करते हुए कुरूद (जिला धमतरी) में कई ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के केंद्र में भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर के चचेरे भाई भूपेंद्र चंद्राकर का नाम सामने आया है, जिसके बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
ईडी की टीम ने सुबह-सुबह दबिश देकर दस्तावेजों और लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाले। इस कार्रवाई को भारतमाला परियोजना के तहत हुए कथित मुआवजा घोटाले से जोड़कर देखा जा रहा है। जांच एजेंसी फिलहाल दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है और मामले में जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी खंगाल रही है।
इस पूरे घटनाक्रम पर छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) अध्यक्ष दीपक बैज ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि छापेमारी भूपेंद्र चंद्राकर के घर हुई है, लेकिन सवाल यह है कि क्या मामला केवल यहीं तक सीमित है या इसके तार अजय चंद्राकर तक भी जुड़े हुए हैं। दीपक बैज ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई किसी बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
पीसीसी चीफ ने यह भी कहा कि देश में एक पैटर्न देखने को मिलता है, जहां विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई के बाद उन्हें सत्ताधारी दल में शामिल कर “क्लीन चिट” दे दी जाती है। उन्होंने संकेत दिया कि इस मामले में भी राजनीति और जांच के बीच संबंधों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
दीपक बैज ने आगे दो संभावनाएं जताईं: या तो यह कार्रवाई भाजपा के अंदरूनी राजनीतिक समीकरणों का हिस्सा है। या फिर उन नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है, जो विधानसभा में सरकार के खिलाफ मुखर रहते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में यह पहली बार है जब किसी भाजपा नेता के परिवार तक ईडी की कार्रवाई पहुंची है, जो अपने आप में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
प्रवर्तन निदेशालय फिलहाल जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रहा है। जांच के दायरे में और नाम आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा। राजनीतिक गलियारों में इस कार्रवाई को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है, जिससे यह मामला अब केवल जांच तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि सियासी टकराव का रूप भी ले चुका है।
भारतमाला परियोजना से जुड़ा यह मामला अब छत्तीसगढ़ की राजनीति के केंद्र में आ गया है। एक तरफ जांच एजेंसियां अपनी कार्रवाई में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप कर रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रवर्तन निदेशालय की जांच कितनी गहराई तक जाती है और क्या इस मामले में बड़े नामों का खुलासा होता है या नहीं।