संचालनालय में अनावश्यक रूप से आने वाले शिक्षाकर्मियों पर रोक लगा दी गई है। शिक्षाकर्मियों के अनावश्यक आने से स्कूलों में शिक्षा प्रभावित होती है
रायपुर . पंचायत विभाग ने संचालनालय में अनावश्यक रूप से आने वाले शिक्षाकर्मियों पर रोक लगा दी है। इस फरमान के बाद शिक्षाकर्मियों और अधिकारियों के बीच एक बार फिर नया विवाद खड़ा हो गया है। पंचायत संचालक तारण प्रकाश सिन्हा ने आदेश जारी कर दो टूक कहा है कि यदि शिक्षाकर्मी बिना अनुमति आते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
इसके जवाब में शिक्षाकर्मियों का कहना है कि जब तक हमारी समस्या रहेंगी, तब तक हम संचालनालय आएंगे, चाहे अधिकारी कोई भी कार्रवाई करें। शिक्षाकर्मी हाईपॉवर कमेटी की रिपोर्ट नहीं आने से पहले ही नाराज है। इस फरमान ने एक बार फिर शिक्षाकर्मियों और सरकार के बीच दूरियां बढ़ाने का काम कर दिया है।
पंचायत संचालक सिन्हा ने जारी आदेश में कहा है कि शिक्षाकर्मी अनावश्यक रूप से आते हैं। इस वजह से विभाग और स्कूल दोनों का काम प्रभावित होता है। जबकि उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए समय-समय पर संघ से चर्चा की जाती है। साथ ही शासन स्तर पर भी पहल की जाती है। शिक्षाकर्मियों की व्यक्तिगत समस्या का निराकरण जिला एवं जनपद पंचायत में हो सकता है।
इसके बाजवूद उक्त कार्यों के लिए संचालनालय आकर काम प्रभावित करना अनुशासनहिनता की श्रेणी में आता है। संचालक ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि, यदि किसी कारण से संचालनालय आना जरूरी है, तो इसके लिए जिला या जनपद पंचायत से अनुमति लेनी होगी।
शिक्षाकर्मी मोर्चा के प्रांतीय संयोजक वीरेन्द्र दुबे ने कहा कि जिला और जनपद स्तर पर समस्याओं का निराकरण नहीं होता है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बावजूद अधिकारी समय पर वेतन नहीं दे पा रहे हैं। हाईपावर कमेटी की अवधि समाप्त होने के बाद भी अभी तक रिपोर्ट नहीं है। अधिकारी हमारा संविलियन कर दें, तो हम संचालनलाय नहीं आएंगे। यदि समस्याएं रहेंगी, तो हम संचालनालय जाएंगे।
शिक्षाकर्मी मोर्चा के प्रांतीय संयोजक संजय शर्मा ने कहा कि जनपद और जिला पंचायत में समस्याएं दूर होती, तो शिक्षाकर्मियों को संचालनालय जाने की जरूरत ही नहीं होती, लेकिन एेसा कभी नहीं होता है। समस्या रहेगी, तो हम उच्च अधिकारी के पास जाएंगे ही। एेसे आदेश पहले भी जारी हुए है, लेकिन शिक्षाकर्मियों की मूलभूत समस्याएं कभी दूर नहीं हो सकी है।