
रायपुर@ अजय रघुवंशी। Chhattisgarh Public Service Guarantee: प्रदेश में सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ समय-सीमा के भीतर जनता तक पहुंचाने के लिए सरकार ने लोक सेवा गारंटी अधिनियम लागू किया था। उद्देश्य था कि लोगों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें और अधिकारियों की जवाबदेही तय हो। लेकिन, 'पत्रिका' की पड़ताल में जो हकीकत सामने आई, वह इन दावों की पोल खोलने के लिए काफी है।
विभागीय अधिकारियों की घोर लापरवाही और उदासीनता से हजारों आवेदन तारीख पर तारीख की भेंट चढ़ रहे हैं। राजस्व, नगर निगम, उद्योग, वाणिज्यिक कर और नगरीय निकाय जैसे प्रमुख विभागों में हजारों आवेदन निर्धारित समय-सीमा के भीतर नहीं निपट रहे हैं।
24 घंटे से लेकर 90 दिन के भीतर निराकरण का वैधानिक प्रावधान होने के बावजूद, कई मामले महीनों से लंबित हैं। स्थिति यह है कि कुछ प्रकरण तीन साल से अधिक समय से धूल फांक रहे हैं। 'पत्रिका' की पड़ताल में पाया गया कि आवेदकों को कभी दस्तावेजों की कमी तो कभी अधिकारियों की अनुपस्थिति बताकर लौटाया जा रहा है। सरकार सेवाओं को ऑनलाइन करने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर जवाबदेही की कमी ने सुशासन के दावों को बेअसर कर दिया है।
विभागों के ये चार्टर कागजों पर तो बेहतरीन दिखते हैं, लेकिन आम नागरिक के लिए ये सिर्फ एक और लंबी कतार का हिस्सा बनकर रह गए हैं। जब तक विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी और लापरवाही के लिए दंड का प्रावधान कड़ाई से लागू नहीं होगा, तब तक लोक सेवा गारंटी का सपना अधूरा ही रहेगा।
केस-1: रायपुर निवासी एडवोकेट रत्नेश अग्रवाल 3 साल से न्याय की बाट जोह रहे हैं। उन्होंने अभनपुर क्षेत्र में जमीन की नकल के लिए 2023 में आवेदन किया था। 2025 और 2026 में दोबारा प्रयास के बाद भी राजस्व विभाग से नकल नहीं मिली।
केस-2: चंपारण के पास रहने वाली चेमन बाई साहू महतारी जतन योजना के लाभ के लिए 60 किलोमीटर का सफर तय कर रायपुर आईं। एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी उन्हें बैंक अकाउंट डुप्लीकेट का तकनीकी बहाना देकर टरकाया जा रहा है।
केस-3: चंगोराभाठा निवासी विजय कुमार को गुमाश्ता बनवाने के लिए एक महीने तक दफ्तर के चक्कर काटने पड़े। बार-बार गुमराह किए जाने के बाद आखिरकार 9 जून को उन्हें उनका दस्तावेज नसीब हुआ।
राजस्व विभाग की स्थिति सबसे चिंताजनक है। यहां सीमांकन, नामांकन, बटांकन और अतिक्रमण जैसे एक लाख से अधिक मामले लंबित हैं। राजस्व मंत्री की फटकार के बावजूद अधिकारियों की कार्यप्रणाली में कोई विशेष सुधार नहीं देखा गया है। वहीं, उद्योग विभाग में सिंगल विंडो सिस्टम के असफल होने के बाद राज्य सरकार को अब राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी का गठन करना पड़ा है ताकि आवेदनों और निवेश की निगरानी की जा सके।
लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत सेवाएं देने का समय निर्धारित है, लेकिन इसका पालन होता नहीं दिख रहा है। राजस्व विभाग में खसरा, खतौनी, नक्शा, नामांतरण, निवास और आय प्रमाण-पत्र के लिए 7 दिन, बंदोबश्त त्रुटि सुधार और जाति प्रमाण-पत्र के लिए 15 दिन और सीमांकन के लिए 30 दिन समय निर्धारित है। नगरीय प्रशासन में हैंडपंप सुधार और आवारा पशुओं को हटाने जैसी सेवाओं के लिए 24 घंटे में और पानी की जांच और सीवर लाइन अवरोध के लिए 7 दिन में करना है।
परिवहन विभाग में वाहन स्वामित्व अंतरण के लिए 15 दिन, फिटनेस नवीनीकरण के लिए 10 दिन और व्यवसाय प्रमाण-पत्र के लिए 20 दिन का समय निर्धारित किया है। आवास एवं पर्यावरण में भवन निर्माण अनुज्ञा के लिए 30 दिन और नई इकाई स्थापना के लिए 120 दिन में करके देना है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास में कॉलोनाइजर पंजीयन के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र के लिए 30 दिन में देना है। खेल एवं युवा कल्याण में खेल संघों की मान्यता के लिए 45 दिन और प्रोत्साहन राशि के लिए 30 दिन निर्धारित किया है।