
Flood Rescue: दो दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण रायपुर जिले में नदी-नाले उफान पर हैं। खारून, महानदी और शिवनाथ नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से तटीय इलाकों के करीब 17 गांवों में बाढ़ की स्थिति निर्मित हो गई है। सैकड़ों घरों और खेतों में पानी भर जाने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। आपदा से निपटने के लिए जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने दिन-भर राहत एवं बचाव कार्य चलाया।
शुक्रवार रात भर हुई बारिश के बाद शनिवार तड़के तक स्थिति नियंत्रण में थी। खारून नदी का पानी रायपुर-अमलेश्वर पुल के नीचे बह रहा था, लेकिन सुबह करीब 5 बजे जलस्तर तेजी से बढ़ा और पानी पुल के ऊपर लगभग 3 फीट तक चढ़ गया। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने पुल के दोनों ओर बैरिकेड्स लगाकर आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया। उधर शिवनाथ नदी का जलस्तर बढ़ने से धरसींवा ब्लॉक के कई गांव जलमग्न हो गए।
बाढ़ के दौरान गोबरा-नवापारा के ग्राम टीला में एक बड़ा हादसा टल गया। महानदी पर निर्माणाधीन एनीकट में काम कर रहे 71 मजदूर अचानक आए पानी के तेज बहाव में फंस गए। जान बचाने के लिए सभी मजदूर एनीकट के पिलरों पर चढ़ गए। सूचना मिलते ही एनडीआरएफ की टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी 71 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला।
दिन-भर चले रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान 16 से अधिक गांवों से 600 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया। प्रभावित ग्रामीणों को ठहराने के लिए स्कूलों, पंचायतों और आंगनबाड़ी भवनों में अस्थायी राहत कैंप बनाए गए हैं। इन शिविरों में 3 हजार से अधिक लोगों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था की गई है। अभनपुर के पारागांव में 250 लोगों को पंचायत भवन में ठहराया गया है, जबकि निसदा गांव में करीब 100 परिवारों के 300 लोग प्रभावित हुए हैं। धरसींवा क्षेत्र से भी 123 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। राहत और बचाव कार्यों के लिए 100 से अधिक पुलिस अधिकारी, जवान, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें प्रभावित इलाकों में मुस्तैदी से तैनात हैं।