
Raipur Municipal Corporation: छत्तीसगढ़ के रायपुर नगर निगम अब शहर के सामाजिक, सामुदायिक भवनों और मंदिर परिसरों में मुफ्त पानी और बिजली की सुविधा पर रोक लगाने की तैयारी कर रहा है। निगम ऐसे परिसरों में लगे मोटर पंपों का सर्वे कराकर उनकी सूची तैयार कर रहा है। इसके बाद इन पंपों के बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई की जाएगी। निगम का कहना है कि जिन संस्थाओं द्वारा इन सार्वजनिक परिसरों का संचालन किया जाता है, उन्हें ही पानी और बिजली के खर्च की जिम्मेदारी उठानी होगी।
नगर निगम के जल कार्य विभाग ने सभी जोन के जल विभाग के इंजीनियरों को ऐसे परिसरों का सर्वे करने के निर्देश दिए हैं। सर्वे में यह पता लगाया जा रहा है कि किस जोन में कितने सामाजिक और सामुदायिक भवन, मंदिर परिसर और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर निगम के मोटर पंप से पानी की सप्लाई हो रही है। इन परिसरों में लगे मोटर पंपों से होने वाले बिजली खर्च का भार अभी निगम को उठाना पड़ता है। अब इस खर्च को कम करने के लिए पंपों को सूचीबद्ध किया जा रहा है।
निगम बिल्डरों द्वारा विकसित की गई निजी आवासीय कॉलोनियों का भी सर्वे करा रहा है। इन कॉलोनियों में पेयजल व्यवस्था किस तरह की है और कितनी कॉलोनियों में पानी की सप्लाई की मांग निगम से की जा रही है, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, कई निजी कॉलोनियों में बिल्डरों ने लेआउट के दौरान खुद पेयजल व्यवस्था करने का प्रावधान रखा था। इसके बावजूद पिछले कुछ वर्षों से इन कॉलोनियों के रहवासियों की ओर से निगम से पानी की सप्लाई की मांग की जा रही है। ऐसे सभी स्थानों की सूची तैयार की जा रही है।
नगर निगम की ओर से कई मुक्तिधामों में बोरवेल या पाइप लाइन के जरिए पानी की व्यवस्था की जाती है। हालांकि, मुक्तिधामों में लगे मोटर पंपों का कनेक्शन काटना है या मुफ्त बिजली-पानी की सुविधा जारी रखनी है, इस पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। जल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मुक्तिधामों को लेकर बाद में अलग से निर्णय लिया जा सकता है।
निगम के अनुसार डगनिया तालाब और रामनगर तालाब के किनारे बोरवेल लगाए गए हैं। इन बोरवेल के जरिए तालाबों में पानी भरा जाता है और मोटर पंप लगातार चलते रहते हैं। अब ऐसे मोटर पंपों का भी सर्वे कराया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक इन पंपों का बिजली कनेक्शन भी बंद करने का निर्णय लिया गया है। इस संबंध में जल बोर्ड से रिपोर्ट मांगी गई है।
नगर निगम शहर में अपने 2200 से अधिक मोटर पंपों के माध्यम से जलापूर्ति करता है। इनमें सामाजिक और सामुदायिक भवनों के साथ मंदिर परिसरों में लगे बोरवेल के पंप भी शामिल हैं। इन पंपों के बिजली खर्च का भार निगम पर पड़ता है। सर्वे पूरा होने के बाद संबंधित संस्थाओं को पानी या बिजली का खर्च खुद उठाना होगा। यदि संस्थाएं खर्च की जिम्मेदारी नहीं लेती हैं, तो निगम ऐसे मोटर पंपों के बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई करेगा।
जल विभाग के कार्यपालन अभियंता नरसिंह फरेन्द्र के अनुसार, जोन स्तर पर सभी परिसरों का सर्वे कराया जा रहा है। कई स्थानों पर मोटर पंपों का बिजली बिल निगम को भरना पड़ता है, जिसे अब बंद करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि मुक्तिधामों के संबंध में अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।