
Supreme Court: छत्तीसगढ़ के रायपुर के शहर की सड़कों पर पैदल चलने वालों के अधिकार को लेकर अब नई बहस शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने फुटपाथ (पाथवे) पर चलने को आम लोगों के मौलिक अधिकार से जोड़ा है, लेकिन राजधानी रायपुर में जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। कई सड़कों पर पाथवे मौजूद ही नहीं हैं और जहां बनाए गए हैं, वहां दुकानों के सामान, ठेले और वाहनों की पार्किंग ने कब्जा कर लिया है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना लोक निर्माण विभाग (PWD) और नगर निगम के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
राजधानी के सबसे पुराने और व्यस्त इलाकों में शामिल सदर बाजार रोड पर दिनभर वाहनों और लोगों की भीड़ रहती है। यह क्षेत्र सोने-चांदी के कारोबार के लिए प्रसिद्ध है, लेकिन सड़क के दोनों किनारे अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग की वजह से पैदल चलने वालों के लिए जगह बेहद कम बचती है। यहां सवाल उठता है कि जब फुटपाथ ही खाली नहीं होंगे तो आम लोग अपने मौलिक अधिकार का इस्तेमाल कैसे करेंगे।
शहर की मुख्य GE रोड पर भी पाथवे की स्थिति एक जैसी नहीं है। कई जगह पेवर ब्लॉक लगाए गए हैं, लेकिन कुछ हिस्सों में स्ट्रीट वेंडरों की दुकानें और वाहनों की पार्किंग दिखाई देती है। सरस्वती नगर थाना क्षेत्र के सामने फुटपाथ पर दुकानें लगी हैं। वहीं नालंदा परिसर से आश्रम चौक तक कई जगह पाथवे नजर नहीं आता। आमापारा चौक से शास्त्री चौक तक भी पैदल यात्रियों के लिए अलग रास्ते की कमी दिखती है।
शास्त्री चौक से मुख्य स्टेशन रोड पर स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिजन पहुंचते हैं। अस्पताल के सामने पाथवे बनाया गया है, लेकिन कई हिस्सों में ठेले, खोमचे और पार्किंग के कारण पैदल चलने वालों को सड़क पर उतरना पड़ता है। इससे दुर्घटना का खतरा भी बना रहता है।
आर्किटेक्ट नवीन शर्मा के अनुसार शहरों की सड़कों पर पाथवे की अनदेखी नहीं की जा सकती। सड़क पर जितना अधिकार वाहन चालकों का है, उतना ही पैदल चलने वालों का भी है। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण और चौड़ीकरण के दौरान तय मानकों के अनुसार पाथवे बनाना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला भविष्य में सड़क निर्माण योजनाओं में फुटपाथ को अनिवार्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सुप्रीम कोर्ट के मानकों के अनुसार पाथवे सड़क से ऊंचाई पर होना चाहिए, लेकिन रायपुर में ऐसी व्यवस्था कुछ ही जगह दिखाई देती है। गौरवपथ और एनआईटी चौक से गोलचौक जाने वाली सड़क जैसे कुछ हिस्सों में बेहतर पाथवे बनाए गए हैं। हालांकि कई अन्य सड़कों पर सिर्फ पेवर ब्लॉक लगाने तक ही व्यवस्था सीमित रह गई है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब शहर की सड़कों पर पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराना जरूरी हो गया है। पाथवे को अतिक्रमण मुक्त रखना, पार्किंग व्यवस्था सुधारना और नए निर्माण में फुटपाथ को प्राथमिकता देना निगम और संबंधित विभागों के सामने बड़ी जिम्मेदारी है।