
Railway News: @हिमांशु शर्मा। पत्रिका की टीम ने आरपीएफ डीजीपी सोनाली मिश्रा से पूछा कि, ट्रेनों से गांजा तस्करी हो रही है। गांजा माफिया अब स्लीपर कोच के साथ एसी कोच में भी तस्करी कर रहे हैं? सभी को पता है कि ओडि़शा समेत अन्य स्थानों से गांजा आ रहा है, फिर भी टीम इसे क्यों नहीं रोक पा रही है? इस पर डीजीपी ने कहा कि ये सबसे बड़ी समस्या है, इसे रोकने के लिए आरपीएफ के साथ जीआरपी, स्टेट पुलिस समेत अन्य एजेंसी भी ज्वाइंट होकर काम कर रही हैं। इसलिए अब घटनाएं भी पता चल रही हैं।
टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है, नए एसओपी बनाए गए हैं, आपके माध्यम से भी जो खबर मिलेगी उसपर तत्परता से कार्य किया जाएगा। हम भी एक कदम आगे बढ़कर कार्य कर रहे हैं, आगे बेहतर कार्रवाई दिखेगी। इसके बाद अधिकारियों ने इशारा कर पत्रकारवार्ता खत्म कर दी। दरअसल, डीजीपी डब्ल्यूआरएस कॉलोनी में आयोजित आरपीएफ के 42वें स्थापना दिवस समारोह मुख्य अतिथि के तौर पहुंची थीं। कार्यक्रम में सांसद बृजमोहन अग्रवाल, जीएम तरुण प्रकाश, डीआरएम दयानंद, छत्तीसगढ़ के डीजीपी, आरपीएफ आईजी मुनव्वर खुर्शीद समेत अन्य अधिकारी शामिल रहे।
हाल ही में लगातार ऐसे कई मामले जोन में सामने आए है, जिसमें गांजा तस्कर स्लपीर की जगह एसी कोच से तस्करी करते पकड़ाए हैं। इनसे पूछताछ में पता चला कि स्लीपर की बजाए अब यह एसी कोच से गांजा को लाना ले जाना करते हैं। क्योंकि इससे आम यात्रियों को शक कम होता है, अच्छे कपड़े पहनकर लगेज व अन्य बैग में गांजा लेकर जाते हैं।
आरपीएफ की ओर से ट्रेनों एवं रेलवे परिसर में नशीले पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाने के लिए ऑपरेशन नारकोस अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत बिलासपुर, रायपुर एवं नागपुर मंडलों में विशेष टास्क टीम गठित कर कार्रवाई की जा रही है। जिसमें साल 2025 में 63 मामलों में 78 आरोपियों को गिरफ्तार कर 713.522 किलोग्राम मादक पदार्थ (लगभग 1.70 करोड़ रुपए मूल्य) जब्त किए गए। वर्ष 2026 में अब तक 30 से अधिक मामलों में 36 आरोपियों की गिरफ्तारी करते हुए 341.745 किलोग्राम मादक पदार्थ (लगभग 1.71 करोड़ रुपए जब्त किए गए हैं।
आरपीएफ के जवानों ने आकर्षण औपचारिक परेड दिखाया, जिसमें रेलवे सुरक्षा बल के अनुशासन, व्यावसायिक दक्षता, तत्परता व परिचालन क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया। आरपीएफ के अधिकारियों एवं सदस्यों को उनकी उत्कृष्ट सेवा, व्यावसायिक उत्कृष्टता और राष्ट्र के प्रति योगदान के लिए आरपीएफ महानिदेशक ने 3 राष्ट्रपति पुलिस पदक, सराहनीय सेवा के लिए 30 पुलिस पदक व साल 2024 में एक रेल यात्री का जीवन बचाने के लिए एक जीवन रक्षा पदक प्रदान किए गए।
समारोह के बाद डीजी स्कूली बच्चों से मिलने पहुंची। इसके बाद प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी में पहुंची। यहां आरपीएफ की ओर से इस्तेमाल किए जा रहा है टेक्नोलॉजी की प्रदर्शनी देखी। इसमें ह्यूमनॉइड रोबोट (डीएससी अर्जुन) आकर्षण का केंद्र रहा।
आरपीएफ डीजीपी ने रेल यात्रियों की सुरक्षा, संरक्षा एवं सुविधा सुनिश्चित करने के प्रति भारतीय रेल की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने व्यावसायिक उत्कृष्टता, आधुनिक तकनीक के उपयोग, अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वित कार्यप्रणाली और परिचालन दक्षता के महत्त्व पर बल दिया।