
मकान-दुकान किराए पर देने के नियम बदले (Photo Patrika)
House rent rules: प्रदेश में मकान-दुकान किराए पर देने और लेने वालों के लिए काम की खबर है। राज्य में सालाना 6000 करोड़ रुपए से अधिक का हो चुका किराए का कारोबार अब नए नियमों के दायरे में होगा। राज्यपाल की मंजूरी के बाद छत्तीसगढ़ भाड़ा नियंत्रण (संशोधन) अधिनियम के प्रावधान लागू होने का रास्ता साफ हो गया है। इससे मकान मालिक और किराएदार, दोनों के अधिकारों को सुरक्षा मिलेगी। मकान मालिक अधिकतम तीन महीने के किराए के बराबर ही सिक्योरिटी डिपॉजिट ले सकेगा।
वहीं, किराएदार को किरायानामे की प्रति और हर भुगतान की रसीद पाने का अधिकार होगा। बिजली-पानी जैसी जरूरी सुविधाएं बंद कर किराएदार पर मकान खाली करने का दबाव नहीं बनाया जा सकेगा। दूसरी ओर, किराया नहीं देने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या तय उद्देश्य से अलग इस्तेमाल करने पर मकान मालिक कानूनी प्रक्रिया के तहत कब्जा वापस मांग सकेगा। नए प्रावधानों से किराए, सुरक्षा निधि और मकान खाली कराने को लेकर होने वाले विवादों पर अंकुश लगाने तथा दोनों पक्षों के हितों में संतुलन बनाने में मदद मिलेगी।
सिक्योरिटी डिपॉजिट की सीमा: मकान मालिक अधिकतम तीन महीने के किराए के बराबर सुरक्षा निधि ले सकेगा।
लिखित किरायानामा और रसीद: किराएदार को करार की प्रति और भुगतान का रिकॉर्ड रखने का अधिकार होगा।
बिजली-पानी बंद नहीं कर सकेंगे: किराएदार पर दबाव बनाने के लिए जरूरी सुविधाएं जानबूझकर बंद नहीं की जा सकेंगी।
किराया वृद्धि की सीमा: मौजूदा अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, समझौते में तय वार्षिक वृद्धि 2,000 रुपए तक के मासिक किराए पर अधिकतम 5% और इससे अधिक किराए पर 10% तक हो सकती है।
समय पर किराया: किराएदार को तय तारीख पर किराया और उपयोग की गई सेवाओं का भुगतान करना होगा।
मकान खाली कराने का अधिकार: किराया नहीं देने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या तय शर्तों का उल्लंघन करने पर मकान मालिक रेंट कंट्रोलर के समक्ष कार्रवाई की मांग कर सकेगा।
निरीक्षण का अधिकार: पूर्व सहमति और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार दिन में मकान का निरीक्षण किया जा सकेगा।
खुद के उपयोग के लिए मकान: निर्धारित परिस्थितियों में कानूनी प्रक्रिया और लागू नोटिस अवधि का पालन कर मकान वापस लिया जा सकेगा।
मकान मालिक या किराएदार के बीच विवाद होने पर संबंधित रेंट कंट्रोलर के समक्ष आवेदन किया जा सकता है। उसके आदेश से असंतुष्ट पक्ष निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रेंट कंट्रोल ट्रिब्यूनल में अपील कर सकता है। मकान मालिक खुद ताला बदलकर या बिजली-पानी काटकर कब्जा नहीं ले सकता। इसी तरह किराएदार भी किरायानामा समाप्त होने या वैध आदेश के बाद अनिश्चितकाल तक कब्जा बनाए रखने का अधिकार नहीं मान सकता।
लिखित किरायानामा बनवाएं। मासिक किराया, सिक्योरिटी डिपॉजिट, भुगतान की तारीख, मरम्मत और मकान खाली करने की शर्तें स्पष्ट रखें। सभी भुगतान की रसीद और रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। किराएदार की जानकारी स्थानीय पुलिस को देने के लिए संबंधित थाने की प्रक्रिया का पालन करें। पंजीकरण, स्टाम्प ड्यूटी और पुराने किरायानामों पर नए संशोधन के लागू होने की स्थिति की पुष्टि संबंधित अधिसूचना से करें।
Updated on:
13 Oct 2026 11:26 am
Published on:
13 Oct 2026 11:26 am
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