रायपुर

Religion Conversion: धर्म परिवर्तन मामले में पास्टर गिरफ्तार, बीमारी ठीक करने का देता था झांसा

Religion Conversion: धर्म परिवर्तन कराने के आरोप में पास्टर को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

2 min read
Mar 17, 2026
धर्म परिवर्तन मामले में पास्टर गिरफ्तार (photo source- Patrika)

Religion Conversion: रायपुर ग्रामीण पुलिस ने खरोरा क्षेत्र में धर्म परिवर्तन कराने के आरोप में एक पास्टर को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह ग्रामीणों को बीमारी ठीक करने का झांसा देकर उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करता था और हिंदू धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां करता था।

ये भी पढ़ें

Conversion: धर्मांतरण पर बवाल, बिगड़ रही कानून व्यवस्था संभाल नहीं पा रहे अफसर

Religion Conversion: पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की

पुलिस के मुताबिक, कठिया नंबर-1 स्थित बजरंग पारा (वार्ड 13) के कुछ निवासियों ने 15 मार्च को शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि आरोपी पास्टर अनुप शेण्डे (28) गांव के लोगों को स्वास्थ्य सुधारने का लालच देता था और इसी बहाने उन्हें अपने प्रभाव में लेने की कोशिश करता था। ग्रामीणों का आरोप है कि वह हिंदू धर्म के खिलाफ अपमानजनक बातें करता था और लोगों पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाता था। शिकायत के आधार पर खरोरा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

Religion Conversion: आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेजा

पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 298, 299 और छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 1968 की धारा 4 के तहत अपराध कायम किया है। आरोपी अनुप शेण्डे, जो मूल रूप से महाराष्ट्र के बन्द्रपुर जिले के नांदाफाटा का निवासी है और वर्तमान में खरोरा के राजीव नगर में रह रहा था, को गिरफ्तार कर लिया गया है। पूछताछ के दौरान उसने आरोपों को स्वीकार कर लिया, जिसके बाद पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया।

धर्म परिवर्तन मामला बेहद ही संवेदनशील

बता दें कि इस तरह के मामलों में प्रशासन आमतौर पर शिकायत, साक्ष्य और बयान के आधार पर जांच करता है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि धर्म परिवर्तन स्वेच्छा से हुआ या किसी प्रकार के प्रलोभन या दबाव के तहत। जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम स्थिति साफ हो पाती है।

यह मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह न केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ा है, बल्कि सामाजिक और धार्मिक संवेदनशीलता से भी संबंधित है। ऐसे मामलों में प्रशासन की भूमिका संतुलन बनाए रखने और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई करने की होती है, ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या तनाव की स्थिति न बने।

Updated on:
17 Mar 2026 01:48 pm
Published on:
17 Mar 2026 01:32 pm
Also Read
View All

अगली खबर