
रायपुर@हिमांशु शर्मा। RPF High Tech Security: रेल यात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को आधुनिक तकनीक से लैस करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। करीब 124 करोड़ रुपए की लागत से बॉडी-वॉर्न कैमरे से निगरानी तंत्र मजबूत करने, वॉकी-टॉकी नेटवर्क की समस्या दूर करने और एनएएफआईएस फिंगरप्रिंट सिस्टम से हिस्ट्रीशीटरों की रियल-टाइम धरपकड़ समेत अन्य आधुनिक सुरक्षा उपकरण खरीदें जाएंगे।
इसका मुख्य उद्देश्य ड्यूटी पर तैनात जवानों की निगरानी, अपराध नियंत्रण और यात्रियों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच को बेहतर बनाना है। ट्रेनों और स्टेशनों पर खाकी के साथ तकनीक का यह पहरा यात्रियों के लिए सुरक्षा का नया भरोसा बन सकता है। इसपर रेलवे लगातार आगे बढ़ रहा है।
ट्रेन में टिकट जांच, सीट को लेकर विवाद, बदसलूकी, अवैध वसूली या रिश्वतखोरी जैसी शिकायतों के मामलों में बॉडी-वॉर्न कैमरे अहम भूमिका निभाती हैं। जवानों की वर्दी पर लगे इन कैमरों से ड्यूटी के दौरान ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग होने पर घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के लिए डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध होंगे। इससे जहां कर्मचारियों की मनमानी पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। वहीं जवानों पर लगाए गए झूठे आरोपों की सच्चाई सामने लाने में भी रिकॉर्डिंग उपयोगी होगी।
सुरक्षा व्यवस्था में नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (एनएएफआईएस) की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यह देशभर के अपराधियों के फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड से मिलान करने में मदद करता है। किसी संदिग्ध के फिंगरप्रिंट लेने के बाद उपलब्ध डेटाबेस से मिलान कर उसकी पहचान और आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच की जा सकती है।
फेस रिकग्निशन और एआई आधारित सीसीटीवी कैमरों के जरिए भीड़भाड़ वाले प्लेटफॉर्म, प्रवेश द्वार और प्रतीक्षालयों में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने की क्षमता बढेगी। इससे त्योहारों और पीक सीजन में चोरी, जहरखुरानी और अन्य आपराधिक घटनाओं की रोकथाम में मदद मिलेगी।
चलती ट्रेनों और दूरस्थ रेलखंडों में मोबाइल नेटवर्क कमजोर होने पर सुरक्षा संबंधी सूचना पहुंचाने में परेशानी आती है। चलती ट्रेन में नो-नेटवर्क जोन में भी त्वरित मदद मॉडर्न वॉकी-टाॅकी से होगी। इससे कई बार बिलासपुर-झारसुगुड़ा या बस्तर-जंगल रूट पर मोबाइल नेटवर्क उड़ जाता है और रेल मदद काम नहीं करता। नए हाई-पावर वॉकी-टॉकी और कम्युनिकेशन हार्डवेयर से ट्रेन एस्कॉर्ट पार्टी अगले स्टेशन या कंट्रोल रूम से रियल-टाइम जुड़ी रहेगी।
रमण कुमार, सीनियर डीएससी, रायपुर के मुताबिक, यात्रियों की सुरक्षा और अपराधियों की धरपकड़ के लिए आरपीएफ हाईटेक तकनीकी का इस्तेमाल कर रहा है। मंडल में वॉकी-टॉकी और बॉडी वार्न कैमरा आ गए हैं। जरूरत के अनुसार और प्रपोजल भेजा गया है। बाकी तकनीकी चीजें भी जल्द मंडल में शुरू होंगी।