विधानसभा चुनाव से पहले संविलियन की मांग को लेकर सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई लड़ने का मन बना रहे हैं। इस स्थिति में सरकार और शिक्षाकर्मियों के बीच एक ब
रायपुर . हाईपावर कमेटी और शिक्षाकर्मियों के बीच 1 मई (मजदूर दिवस) को होने वाली बैठक में राहत की उम्मीद कम नजर आ रही है। कारण यह है कि शिक्षाकर्मियों की सबसे प्रमुख मांग संविलियन को कमेटी के एजेंण्डा में शामिल नहीं किया गया है। जबकि, शिक्षाकर्मी आगामी विधानसभा चुनाव से पहले संविलियन की मांग को लेकर सरकार के साथ आर-पार की लड़ाई लड़ने का मन बना रहे हैं। इस स्थिति में 1 मई को होने वाली बैठक के बाद सरकार और शिक्षाकर्मियों के बीच एक बार फिर दूरियां बढ़ सकती है।
हाईपावर कमेटी ने शिक्षाकर्मी संघों के नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया था। इसमें भी पूरी बातचीत नहीं हो सकी थी। माना जा रहा है कि 1 मई की बैठक में बातचीत के इस सिलसिले को आगे बढ़ाया जा सकता है। साथ ही राजस्थान से अध्ययन कर वापस लौटी 4 सदस्यीय टीम की रिपोर्ट पर भी चर्चा हो सकती है।
वहीं शिक्षाकर्मी संघ से जुड़े नेता दबीजुबान में इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि 1 मई की बैठक में कोई ठोस हल नहीं निकलेगा। हालांकि प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि कमेटी ने लगभग अपनी तमाम जानकारी जुटा ली है। संविलियन को छोड़कर अन्य मांगों पर सार्थक पहल हो सकती है। गौरतलब है कि हाईपावर कमेटी को अपनी रिपोर्ट 5 मई तक सरकार को सौंपनी है। इस बैठक के बाद यदि कमेटी ने अपनी रिपोर्ट नहीं दी, तो एक बार फिर उनका कार्यकाल बढ़ाना पड़ सकता है।
16 माह से लंबित डीए के भुगतान की मांग
शिक्षाकर्मी संघ के नेताओं का आरोप है कि शिक्षाकर्मियों को पिछले 16 माह से डीए का भुगतान नहीं हुआ है। इससे शिक्षाकर्मियों में निराशा है। शिक्षाकर्मियों ने बैठक से पहले डीए के भुगतान का आदेश जारी करने की मांग की है।